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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

चंपावत गैंगरेप मामला निकला झूठा, नाबालिग ने खुद खोली साजिश की पोल

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चंपावत में भाजपा कार्यकर्ता पर लगे गैंगरेप के आरोप फर्जी निकले। नाबालिग ने मजिस्ट्रेट के सामने स्वीकारी कमल रावत की साजिश। जानिए क्या है पूरी सच्चाई।

चंपावत। जिले में पिछले कुछ दिनों से चर्चाओं में रहा सामूहिक दुष्कर्म का मामला पूरी तरह फर्जी पाया गया है। पुलिस की सघन जांच और स्वयं पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयानों के बाद इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया है। कथित पीड़ित नाबालिग लड़की ने अब खुद स्वीकार किया है कि उसके साथ ऐसी कोई घटना कभी हुई ही नहीं थी।
नाबालिग ने खुलासा किया कि उसे भाजपा के एक पूर्व पदाधिकारी कमल रावत ने पैसों और मदद का लालच दिया था। कमल रावत के कहने पर ही उसने भाजपा कार्यकर्ता और उनके दो साथियों के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने अब न्यायालय के सामने स्पष्ट कर दिया है कि उस पर दबाव डालकर यह बयान दिलवाया गया था।
इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट ने भी पुलिस की जांच को मजबूती दी है। चंपावत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने बताया कि लड़की की मेडिकल जांच में किसी भी तरह के दुष्कर्म या शारीरिक हमले की पुष्टि नहीं हुई है। वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी घटना वाले दिन आरोपियों की मौजूदगी उस स्थान पर नहीं पाई गई।
एसपी चंपावत ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कमल रावत पूर्व में अपने साथ हुई किसी घटना के लिए अन्य कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार मानता था। इसी का बदला लेने के लिए उसने एक नाबालिग बच्ची को मोहरा बनाकर यह राजनीतिक साजिश रची थी। पुलिस अब इस मामले में झूठे साक्ष्य पेश करने और साजिश रचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
चंपावत पुलिस की इस मुस्तैदी से बेगुनाह लोग बड़ी मुसीबत में फंसने से बच गए हैं। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे निजी रंजिश के लिए गंभीर धाराओं का दुरुपयोग किया गया। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें और निष्पक्ष जांच की प्रतीक्षा करें।

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