अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
चम्पावत कांड: सामूहिक दुष्कर्म की कहानी निकली फर्जी, पूर्व BDC समेत 2 गिरफ्तार
चम्पावत पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म की झूठी साजिश का पर्दाफाश किया। नाबालिग को बंधक बनाकर वीडियो वायरल करने के आरोप में कमल और अर्जिता जेल भेजे गए। जानें पूरा मामला।
चम्पावत। उत्तराखंड के चम्पावत जिले में बीते बुधवार को सामने आए ‘कथित सामूहिक दुष्कर्म’ के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस जांच में यह पूरी घटना एक गहरी और घिनौनी साजिश निकली, जिसे विरोधियों को फंसाने के लिए रचा गया था। इस मामले में पुलिस ने पूर्व बीडीसी सदस्य कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र अर्जिता राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
घटना की शुरुआत सल्ली गांव में हुई थी, जहां नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की बात कही गई थी। हालांकि, जब पुलिस ने गहराई से तफ्तीश की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। वादी राम सिंह रावत की तहरीर के अनुसार, मुख्य आरोपी कमल सिंह ने उनके मकान का ताला तोड़कर नाबालिग को वहां जबरन बंधक बनाया था। साजिश को असली दिखाने के लिए नाबालिग के पैर रस्सी से बांध दिए गए थे।
कोतवाल बीएस बिष्ट ने बताया कि आरोपियों ने न केवल नाबालिग को बंधक बनाया, बल्कि उसका एक झूठा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस साजिश का मुख्य उद्देश्य निर्दोष लोगों को पॉक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मुकदमे में फंसाना था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कमल सिंह रावत और अर्जिता राय को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें न्यायालय के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
इस मामले में तीसरा आरोपी आनंद सिंह महरा बताया जा रहा है, जो स्थानीय कांग्रेस नेता है। पुलिस ने आनंद के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून के साथ खिलवाड़ करने और जांच एजेंसियों को गुमराह करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस खुलासे के बाद चम्पावत में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों ने पुलिस की सूझबूझ और निष्पक्ष जांच की सराहना की है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील वीडियो को बिना पुष्टि के साझा न करें, अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल, पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है।
