Report by : CWN Desk
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बागेश्वर की 10 वर्षीय रूही मनकोटी बनीं ‘पहाड़ की ब्रांड एंबेसडर’, ब्लॉगिंग से बचा रहीं लोक संस्कृति

बागेश्वर की रूही मनकोटी अपनी ब्लॉगिंग और कला के जरिए उत्तराखंड की संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिला रही हैं। जानें इस नन्ही ब्लॉगर की प्रेरक कहानी।

बागेश्वर: आज के दौर में जहाँ बच्चे मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया के जाल में फंसे हैं, वहीं उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की 10 वर्षीय रूही मनकोटी एक नई मिसाल पेश कर रही हैं। रूही अपनी सादगी और अटूट आत्मविश्वास के दम पर न केवल एक लोकप्रिय ब्लॉगर बन गई हैं, बल्कि वे उत्तराखंड की लोक संस्कृति की रक्षक के रूप में भी उभरी हैं। उनकी इस छोटी सी उम्र की बड़ी उपलब्धि ने उन्हें सोशल मीडिया पर एक अलग पहचान दी है।


​पहाड़ की सादगी को मिला डिजिटल प्लेटफॉर्म
मूल रूप से बागेश्वर की रहने वाली रूही मनकोटी अपने ब्लॉग्स के माध्यम से खेत-खलिहान, पारंपरिक खान-पान और पहाड़ की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद जीवंत ढंग से पेश करती हैं। उनके वीडियो में केवल प्रकृति की सुंदरता ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के तीज-त्योहारों और ग्रामीण परिवेश का असली चित्रण मिलता है। रूही की सहजता और कैमरे के सामने बात करने का उनका खास अंदाज हर किसी को अपना मुरीद बना लेता है।


​बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं रूही
ब्लॉगिंग के अलावा रूही उत्तराखंड के लोकगीतों पर अपने शानदार नृत्य और पारंपरिक वेशभूषा के लिए भी पहचानी जाती हैं। वे एक बेहतरीन चित्रकार भी हैं; उनकी बनाई पेंटिंग्स को सोशल मीडिया पर खूब सराहा जाता है। उनके कंटेंट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मनोरंजन के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का सराहनीय काम कर रही हैं।


​पहाड़ की बेटियों के लिए रोल मॉडल
रूही की सफलता यह साबित करती है कि यदि मन में अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम हो, तो उम्र मायने नहीं रखती। आज वे न केवल बागेश्वर बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटियों के लिए एक रोल मॉडल बन गई हैं। रूही के माध्यम से आज दुनिया भर के लोग उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं को देख और समझ पा रहे हैं। उनका यह सफर उन सभी बच्चों के लिए एक सीख है जो अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं।

डिजिटल युग में लोक संस्कृति की मशाल: बागेश्वर की 10 साल की रूही मनकोटी बनीं युवाओं के लिए प्रेरणा

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