हल्द्वानी
हल्द्वानी के पीएसपी अस्पताल में मंडलसेरा के बुजुर्ग की मौत, एडीएम ने दिए संयुक्त जांच के आदेश
हल्द्वानी के पीएसपी हॉस्पिटल में बागेश्वर निवासी प्रेम गिरी की मौत के बाद बवाल। जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर संयुक्त जांच समिति गठित, 7 दिन में मांगे साक्ष्य।
हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित पीएसपी (PSP) हॉस्पिटल में उपचार के दौरान एक बुजुर्ग मरीज की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) नैनीताल, विवेक राय ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक त्रिस्तरीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया है। इस विशेष समिति में नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी हल्द्वानी और मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल द्वारा नामित एक वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह समिति चिकित्सा मानकों की बारिकी से पड़ताल करेगी।
यह पूरा मामला बागेश्वर के मंडलसेरा निवासी 65 वर्षीय प्रेम गिरी से जुड़ा हुआ है। वह पिछले कुछ समय से पीएसपी हॉस्पिटल में उपचाराधीन थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की चिकित्सीय प्रक्रिया में खामियां थीं, जिसके कारण बुजुर्ग की जान गई। गठित समिति अब मरीज के उपचार, ऑपरेशन और चिकित्सीय प्रबंधन से जुड़े सभी मूल अभिलेखों की गहनता से समीक्षा करेगी।
अपर जिलाधिकारी के अनुसार, जांच समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रचलित नियमों, मानकों और वैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं। यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर डॉक्टरों या स्टाफ की लापरवाही अथवा तकनीकी अनियमितता पाई जाती है, तो उसके संबंध में स्पष्ट उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समिति आवश्यक सुझाव भी देगी।
प्रशासन ने इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। अपर जिलाधिकारी ने कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास इस घटना से संबंधित कोई भी प्रामाणिक जानकारी, मौखिक या लिखित बयान अथवा साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो वह सूचना प्रकाशन के 07 दिनों के भीतर जांच समिति के किसी भी अधिकारी के कार्यालय में जाकर इसे प्रस्तुत कर सकता है। साक्ष्य पंजीकृत डाक द्वारा भी भेजे जा सकते हैं।
