नई दिल्ली
घर पर बनाई कुकर से डायलिसिस मशीन, डॉक्टरों को किया हैरान
चीन के हू सोंगवेन (Hu Songwen) ने अस्पताल का खर्च न उठा पाने पर घर में जुगाड़ से डायलिसिस मशीन बना डाली। इस अनोखी मशीन से वह 13 साल तक जीवित रहे। पूरी खबर पढ़ें।
चीन के रहने वाले हू सोंगवेन (Hu Songwen) की कहानी इन दिनों दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। साल 1993 में जब हू कॉलेज में मौसम वैज्ञानिक बनने की पढ़ाई कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। डॉक्टरों ने उन्हें जिंदा रहने के लिए नियमित रूप से अस्पताल जाकर डायलिसिस कराने की सलाह दी। लेकिन कुछ ही सालों में अस्पताल का भारी-भरकम खर्च उठाते-उठाते उनका पूरा परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया।
आर्थिक तंगी से तंग आकर हू सोंगवेन ने हार मानने के बजाय एक अनोखा रास्ता चुना। उन्होंने अपने घर की रसोई में मौजूद प्रेशर कुकर, कुछ बर्तनों और बाजार से खरीदे गए मेडिकल पार्ट्स की मदद से खुद की एक ‘होममेड डायलिसिस मशीन’ तैयार कर डाली। वह बाजार से साधारण नमक, बेकिंग सोडा और पोटेशियम क्लोराइड खरीदकर खुद ही सटीक अनुपात में डायलिसिस फ्लूइड भी तैयार करते थे। डॉक्टरों ने शुरू में इस कदम को बेहद खतरनाक और जानलेवा बताया था।
चिकित्सा जगत के कड़े नियमों को चुनौती देते हुए हू इस देसी मशीन के सहारे करीब 13 सालों तक न सिर्फ जिंदा रहे, बल्कि अपना इलाज भी खुद करते रहे। विशेषज्ञ हैरान थे कि बिना किसी बैक्टीरिया-मुक्त (Sterile) माहौल के उन्हें कोई जानलेवा इन्फेक्शन नहीं हुआ। हू के मुताबिक, अस्पताल में एक बार के डायलिसिस का खर्च उनके घर के खर्च से आठ गुना ज्यादा था, जिसके कारण उन्हें यह जानलेवा कदम उठाना पड़ा।
जब हू सोंगवेन का यह मामला इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो चीनी प्रशासन और स्वास्थ्य विभागों में हड़कंप मच गया। सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए हू को बेहद कम दरों पर आधिकारिक मेडिकल डायलिसिस की सुविधा मुहैया कराई। डॉक्टरों ने उन्हें अपनी घरेलू मशीन का इस्तेमाल तुरंत बंद करने की सख्त हिदायत दी, क्योंकि यह तरीका दूसरों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह घटना साबित करती है कि इंसान की जीने की जिद्द कभी-कभी विज्ञान की सीमाओं को भी पीछे छोड़ देती है।
