Report by : CWN Desk
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विकास और संरक्षण साथ-साथ संभव: IGNFA में बोले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

देहरादून स्थित IGNFA में IFS अधिकारियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि विकास और संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। जानिए उनके संबोधन की मुख्य बातें।

देहरादून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2025-2027 बैच और रॉयल भूटान वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों सदैव साथ-साथ चल सकते हैं। इस दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2070 तक भारत के ‘शुद्ध-शून्य उत्सर्जन’ (Net-Zero Emissions) के लक्ष्य को प्राप्त करने और देश की पारिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत करने में वन सेवा के अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे वर्तमान विकास की आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच सही संतुलन स्थापित करें। इसके साथ ही उन्होंने वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को ही अधिकारियों के करियर की वास्तविक सफलता का पैमाना बताया।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा-आधारित प्रणालियों को क्षेत्रीय अनुभव के साथ जोड़ा जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने पीढ़ियों से जंगलों में रह रहे स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करने और उनके साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने वन सेवा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी जाहिर की और बताया कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो नारी शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने युवा अधिकारियों को सत्यनिष्ठा से कार्य करने और “राष्ट्र प्रथम” के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। कार्यक्रम में IGNFA के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद और कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लोंगजाम भी मौजूद रहे।

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