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हरिद्वार

हरिद्वार: झंकार डांस एकेडमी के बाल कलाकारों को मिले शास्त्रीय नृत्य प्रमाण पत्र

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हरिद्वार की झंकार डांस एकेडमी में प्रयाग संगीत समिति से सफल बाल नृत्य कलाकारों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। बच्चों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान।

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित न्यू धीरवाली में संचालित झंकार डांस एकेडमी में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से सम्बद्ध इस एकेडमी के बाल नृत्य कलाकारों को परीक्षाओं में शानदार सफलता पाने पर प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। परीक्षा में प्रवेशिका से लेकर प्रभाकर स्तर तक सफलता हासिल करने वाले बच्चों के चेहरों पर इस उपलब्धि से खुशी की लहर दिखाई दी।
एकेडमी के स्टूडियो परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में अध्यात्म चेतना संघ के संस्थापक आचार्य करुणेश मित्र और चेतना पथ के सम्पादक व साहित्यकार अरुण कुमार पाठक बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने अपने कर-कमलों द्वारा सफल कलाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर संस्थान की संरक्षिका श्रीमती अर्चना वर्मा तिवारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। सम्मानित होने वाले कलाकारों में तीन वर्ष की छोटी आयु के नन्हें बच्चे भी शामिल थे।
समारोह के दौरान स्वीकृति तिवारी, वन्या, जैसिका वालिया, काशवी, अन्विता उपाध्याय, अदिति सैनी, अन्यका, आदिश्री, आदित्य चौहान, अंशिका, शामवी, अर्ना वर्मा, तनिष्का वर्मा, दिया सैनी, अदिति बेलवाल, विंध्या सक्सैना और रक्षा राणा सहित कई अन्य प्रतिभाशाली बच्चों को पुरस्कृत किया गया। अतिथियों ने सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनकी मेहनत व लगन की सराहना की।
एकेडमी की संचालिका व युवा नृत्यांगना आचार्य स्वाति वर्मा ने बताया कि उनकी संस्था पिछले एक दशक से नृत्य और संगीत के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। यहाँ योग्य प्रशिक्षकों द्वारा कथक जैसे शास्त्रीय नृत्य के साथ-साथ वेस्टर्न, बॉलीवुड, सालसा, भांगड़ा, गिद्दा, लावणी और गरबा-डांडिया का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा संस्था बच्चों को विभिन्न वाद्य संगीत सिखाने का कार्य भी पूरी निष्ठा के साथ कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि यहाँ से सीखकर निकले बाल कलाकार हरिद्वार और आसपास के जिलों में कई मंचों पर अपनी सफल प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। संस्था का उद्देश्य क्षेत्र की नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, कला और संगीत से जोड़ना है। कार्यक्रम का समापन बच्चों के उत्साहवर्धन और परिजनों की शुभकामनाओं के साथ हुआ।

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