देहरादून
धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में स्वैच्छिक चकबंदी और होम स्टे के नए नियम
उत्तराखंड कैबिनेट ने पहाड़ों में स्वैच्छिक चकबंदी और होम स्टे नियमावली में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। जानें कैसे इन फैसलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगी नई रफ़्तार।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के विकास के लिए कई दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘स्वैच्छिक चकबंदी नीति’ (Voluntary Land Consolidation) को मंजूरी देना रहा। लंबे समय से पहाड़ के बिखरे हुए खेतों को एक जगह करने की मांग उठ रही थी, जिस पर अब सरकार ने मुहर लगा दी है। इससे मशीनीकरण और बागवानी को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यटन के क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘होम स्टे नियमावली’ में बड़ा संशोधन किया है। अब होम स्टे संचालक अपने परिसर में छह के स्थान पर आठ कमरों तक का निर्माण कर सकेंगे। इस फैसले से स्थानीय निवासियों की आय में वृद्धि होगी और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस वृद्धि के माध्यम से अधिक से अधिक युवा अपने गांवों में ही रहकर स्वरोजगार से जुड़ें।
शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने उदारता दिखाई है। लोहाघाट स्थित महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए प्राचार्य समेत 16 नए पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 277 संविदा कर्मचारियों के लिए ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। वहीं, ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत भवन निर्माण की राशि 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।
ऊर्जा क्षेत्र में कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए सरकार ने अब ऊर्जा के तीनों निगमों में बाहर से भी प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इससे विभागों में विशेषज्ञता और पारदर्शिता आने की उम्मीद है। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के ढांचे में 11 नए पदों के सृजन को भी हरी झंडी मिल गई है। ये सभी निर्णय राज्य की बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
