देहरादून
धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में ‘नो व्हीकल डे’ और वर्क फ्रॉम होम लागू
उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब राज्य में ‘नो व्हीकल डे’ मनेगा, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी बेड़े में 50% इलेक्ट्रिक वाहन शामिल होंगे।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड की ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने राज्य में ईंधन खपत कम करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का अनुसरण करते हुए छोटे व्यावहारिक बदलाव अपनाने का आग्रह किया है।
सरकार ने निर्णय लिया है कि अब सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ (No Vehicle Day) के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन बेड़े को 50 प्रतिशत तक कम कर दिया जाएगा। सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों को प्राथमिकता दी जाएगी। निजी क्षेत्र को भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव और ईंधन की खपत कम हो सके।
परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ की नीति लागू की गई है। बहु-विभागीय जिम्मेदारी वाले अधिकारी अब दिन में केवल एक ही सरकारी वाहन का उपयोग कर सकेंगे। राज्य में जल्द ही एक प्रभावी ‘ईवी पॉलिसी’ (EV Policy) लाई जाएगी, जिसके तहत भविष्य में खरीदे जाने वाले 50 प्रतिशत सरकारी वाहन अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगे। इसके लिए चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क को भी युद्ध स्तर पर विकसित किया जाएगा।
आर्थिक स्थिरता के लिए सरकार ने विदेशी यात्राओं को सीमित करने और ‘Visit My State’ अभियान के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का फैसला किया है। नागरिकों को सोने की खरीद सीमित करने और कम तेल वाले भोजन के प्रति जागरूक किया जाएगा। स्कूलों और सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा होगी। साथ ही, ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ अभियान के जरिए स्थानीय उत्पादों (Made in State) की बिक्री बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
अंत में, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम सूर्य घर योजना’ और पीएनजी (PNG) कनेक्शनों को मिशन मोड में विस्तार दिया जाएगा। सौर और बिजली परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। यह समिति 60 दिनों के भीतर प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान करेगी। इन सुधारों का उद्देश्य उत्तराखंड को आत्मनिर्भर और ऊर्जा-कुशल राज्य बनाना है।
