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नैनीताल

उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: हर शुक्रवार होगी वर्चुअल सुनवाई, ईंधन बचाने के लिए अनूठी पहल

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पर्यावरण और ईंधन की बचत के लिए हर शुक्रवार को वर्चुअल सुनवाई का आदेश दिया है। वकीलों और कर्मचारियों से पैदल कोर्ट आने की अपील की गई है

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद सराहनीय और ऐतिहासिक कदम उठाया है। माननीय मुख्य न्यायाधीश के विशेष आदेश पर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा एक आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इस नए आदेश के मुताबिक, अब हाईकोर्ट के कार्य दिवस वाले प्रत्येक शुक्रवार को ‘वर्चुअल सुनवाई दिवस’ के रूप में चिह्नित किया गया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अदालती कामकाज को आधुनिक तकनीक से जोड़कर पर्यावरण को बचाना है।
इस नए नियम के अनुसार, हर शुक्रवार को मुकदमों की सुनवाई मुख्य रूप से ऑनलाइन यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही संचालित की जाएगी। डिजिटल माध्यम से जुड़ने के कारण अब अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं को बेवजह लंबी यात्राएं नहीं करनी पड़ेंगी। हालांकि, कोर्ट ने इस नियम में उन वकीलों को थोड़ी छूट जरूर दी है जो तकनीकी दिक्कतों के कारण ऑनलाइन जुड़ने में असमर्थ हैं। इसके अलावा जो स्थानीय अधिवक्ता पैदल चलकर कोर्ट परिसर तक पहुंचते हैं, वे भी अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित हो सकते हैं।
हाईकोर्ट ने नैनीताल शहर से बाहर जैसे हल्द्वानी, भवाली और काठगोदाम आदि क्षेत्रों में रहने वाले वकीलों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने इन बाहरी क्षेत्रों के वकीलों से पुरजोर अनुरोध किया है कि वे केवल शुक्रवार ही नहीं, बल्कि सप्ताह के बाकी दिनों में भी नैनीताल आने के बजाय वर्चुअल मोड का ही उपयोग करें। इससे न सिर्फ कीमती ईंधन की भारी बचत होगी, बल्कि पहाड़ी रास्तों और पहाड़ों की संवेदनशील सड़कों पर वाहनों का बढ़ता दबाव भी काफी हद तक कम हो सकेगा।
इस क्रांतिकारी और दूरदर्शी फैसले के बाद उत्तराखंड के कानूनी गलियारों और पर्यावरणविदों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। बार काउंसिल और स्थानीय वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे समय की मांग बताया है। लोगों का मानना है कि इस कदम से नैनीताल में लगने वाले ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। न्यायालय प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि इको-सेंसिटिव जोन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
संक्षेप में कहें तो, जमीनी स्तर पर पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण को लागू करने के लिए हाईकोर्ट का यह प्रयास बेहद अनुकरणीय है। अदालत ने स्थानीय स्तर पर नैनीताल में रहने वाले सभी वकीलों, अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पैदल ही कोर्ट आने की अपील की है। उच्च न्यायालय की यह अनूठी पहल देश की अन्य अदालतों के लिए भी निश्चित रूप से एक बेहतरीन मिसाल साबित होगी।

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