देहरादून
देहरादून में डिजिटल अरेस्ट का बड़ा शिकार: रिटायर कर्मचारी से ₹40 लाख की ठगी, 8 दिन तक घर में कैद
देहरादून के पंडितवाड़ी में साइबर ठगों ने बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर ₹40 लाख लूटे। खुद को एनआईए और दिल्ली पुलिस का अफसर बताकर डराया। साइबर थाना पुलिस ने दर्ज किया केस।
देहरादून। साइबर अपराधियों ने एक बार फिर खौफ का जाल बुनकर एक बुजुर्ग को अपना निशाना बनाया है। इस बार ठगों ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) से रिटायर कर्मचारी को आठ दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान आरोपियों ने पीड़ित के मन में गिरफ्तारी और जेल जाने का इतना डर पैदा कर दिया कि उन्होंने अपने बैंक खातों से ₹40 लाख ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून ने गुरुवार को इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पंडितवाड़ी निवासी 68 वर्षीय मुकेश पांडे ने पुलिस को बताया कि ठगी का यह सिलसिला 10 दिसंबर को एक अनजान कॉल से शुरू हुआ। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनका आधार कार्ड आतंकियों के पास मिला है। ठगों ने खुद को एनआईए (NIA) अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया कि उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है। उन्हें धमकी दी गई कि उन्हें पुणे के डिटेंशन सेंटर में तीन-चार महीने के लिए बंद कर दिया जाएगा।
जालसाजों ने बुजुर्ग को सख्त हिदायत दी कि वे इस बारे में किसी को न बताएं, वरना पूरी गोपनीयता भंग होने के आरोप में उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। ठग हर तीन घंटे में उनकी लोकेशन मांगते रहे और उन्हें घर के भीतर ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा। 13 दिसंबर को सिग्नल एप के जरिए फर्जी वारंट भेजकर खातों के सत्यापन के नाम पर ₹40 लाख ट्रांसफर करवा लिए गए। जब ठगी का अहसास हुआ, तब पीड़ित ने 17 दिसंबर को साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
साइबर अपराध थाने के डिप्टी एसपी कुश मिश्रा ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब उन बैंक ट्रांजेक्शन और मोबाइल नंबरों को ट्रेस कर रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी में हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर किसी को गिरफ्तार या ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
