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हल्द्वानी

हल्द्वानी में सरस मेले का रंगारंग आगाज

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हल्द्वानी। जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित दस दिवसीय सरस मेला शनिवार देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रारंभ हुआ। मुख्य अतिथि कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर मेले का शुभारंभ किया।

महिलाओं की आजीविका को बढ़ावा

एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित उद्घाटन समारोह में विधायक भगत ने कहा कि सरस मेला महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उनकी आजीविका को सशक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चलाई जा रही महिला सशक्तिकरण योजनाओं का उल्लेख किया।

महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने कहा कि यह मेला महिला समूहों के लिए आर्थिक मजबूती की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इससे पूर्व सीडीओ अशोक कुमार पांडेय ने मेले में आधुनिकता और नवीनता के समावेश पर जोर दिया।

संस्कृति का जलवा

उद्घाटन समारोह के दौरान नूपुर कला केंद्र के बाल कलाकारों ने गणपति वंदना और छपेली नृत्य प्रस्तुत किया। लोक गायक महिपाल सिंह मेहता ने कुमाऊंनी गीतों से समा बांधा। इससे पूर्व महिलाओं ने रंगोली पिछौड़ा पहनकर मुख्य द्वार पर होली गायन किया।

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व्यापार और रोजगार के अवसर

मेले में 250 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें उत्तराखंड के 117 और अन्य राज्यों के 74 स्टॉल शामिल हैं। इसके अलावा कई व्यावसायिक स्टॉल भी लगाए गए हैं।

विशेष अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर पूर्व महापौर जोगेंद्र सिंह रौतेला, ब्लॉक प्रशासक रूपा देवी, प्रमोद तोलिया, तरुण बंसल, पार्षद सचिन तिवारी, डीडीओ गोपाल गिरी गोस्वामी, सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी, सहायक परियोजना अधिकारी चंदा फर्त्याल, एसडीएम नवाजिश खलिक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

स्टार नाइट ने मोहा मन

शनिवार देर शाम आयोजित स्टार नाइट कार्यक्रम में कोक स्टूडियो के कलाकार लोक गायक दिग्विजय सिंह रावत और लोक गायिका कमला देवी ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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रात आठ बजे जब दिग्विजय और कमला देवी मंच पर पहुंचे, तो दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। दिग्विजय सिंह रावत ने अपने अंदाज में गोपाल बाबू गोस्वामी का प्रसिद्ध गीत “बेड़ू पाको बारा मासा” गाकर शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने चंद्र सिंह राही का गीत “भाना रे रंगीली भाना, रंगीली छाना” और “रुकसा रे मोती घुंघरर न बाजा छम” प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

इसके बाद उन्होंने माइक कमला देवी को सौंपा, तो दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया। दोनों गायकों ने न्यौली और छपेली शैली में गीत पेश किए। कमला देवी ने “तू सुवा फूलों की रंग ओड़ियो सोनचड़ी-मैं सुवा फूलों मा मौन” और “कान में छुमकी” जैसे लोकगीत गाकर दर्शकों से खूब वाहवाही लूटी।

इस सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को पहाड़ी लोक संगीत की मधुर धुनों से सराबोर कर दिया और सरस मेले की भव्यता में चार चांद लगा दिए।

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