Connect with us

अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

अल्मोड़ा के धनी राम: 80 की उम्र में जीवित रखे हैं पहाड़ की नक्काशी कला

Published

on

खबर शेयर करें 👉

अल्मोड़ा के धौलादेवी ब्लॉक के 80 वर्षीय धनी राम पिछले कई दशकों से उत्तराखंड की पारंपरिक लकड़ी हस्तशिल्प कला को संजोए हुए हैं। अब अगली पीढ़ी भी बढ़ा रही विरासत।

अल्मोड़ा: आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहाँ पुरानी परंपराएं और कलाएं दम तोड़ रही हैं, वहीं उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो किसी प्रेरणा से कम नहीं है। धौलादेवी ब्लॉक के ग्राम खौड़ी के निवासी, 80 वर्षीय धनी राम आज भी अपनी मिट्टी और हुनर से गहराई से जुड़े हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और अपनी विरासत के प्रति समर्पण देखते ही बनता है।
धनी राम पिछले कई दशकों से उत्तराखंड की पारंपरिक और प्रसिद्ध लकड़ी की हस्तशिल्प कला (काष्ठ कला) को जीवित रखे हुए हैं। उनके हाथों से तैयार की गई बारीक नक्काशी केवल लकड़ी पर उकेरी गई आकृतियाँ नहीं हैं, बल्कि ये देवभूमि की संस्कृति, अगाध आस्था और गौरवशाली इतिहास की एक जीवंत झलक पेश करती हैं। किसी समय में पहाड़ के घरों, मंदिरों और मुख्य द्वारों (लिखुड़ाई) की पहचान रही यह कला आज धनी राम जैसे शिल्पकारों के कारण टिकी हुई है।
धनी राम बताते हैं कि नक्काशी की इस विरासत को संजोने के लिए अपार धैर्य और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। जब लोग पुराने कौशल को भूलते जा रहे हैं, तब वे अपने हुनर से देवभूमि की नक्काशीदार परंपरा को नई पहचान दिला रहे हैं। उनकी कार्यशाला में लकड़ी का हर टुकड़ा एक कहानी कहता है, जिसमें पहाड़ के संस्कारों और पुरानी वास्तुकला की महक रची-बसी होती है।
सबसे गर्व और सुकून देने वाली बात यह है कि धनी राम के परिवार की अगली पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला को अपना रही है। उनके परिवार ने इस संकल्प को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है, ताकि आने वाले समय में भी उत्तराखंड की यह पहचान सुरक्षित रहे। धनी राम जैसे समर्पित कलाकार वास्तव में उत्तराखंड की असली शान हैं, जो अपनी जड़ों को सींचकर भावी पीढ़ी के लिए एक मजबूत सांस्कृतिक आधार तैयार कर रहे हैं।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Select Language

Advertisement