अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
“भगवान भरोसे NH: दफ्तर से सर्विस बुक गायब, EE ने चावल मंगवाने का आदेश दिया”
चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) विभाग के एक दफ्तर में घटित घटना ने सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) द्वारा कर्मचारियों से दो-दो मुट्ठी चावल लाने का लिखित आदेश जारी किया गया है। यह आदेश तब सामने आया है जब उसी कार्यालय से एक असिस्टेंट इंजीनियर (AE) की सर्विस बुक गायब हो गई और उसकी जिम्मेदारी तय करने के बजाय EE ने चावल एकत्र करने का फरमान सुना दिया।

सवाल उठता है कि जब दफ्तर की मूलभूत जिम्मेदारी—जैसे सर्विस बुक सुरक्षित रखना—निभाई नहीं जा रही है, तो सड़क निर्माण जैसे बड़े कार्यों की गुणवत्ता पर क्या भरोसा किया जा सकता है? ऐसे में चावल मांगने जैसा हास्यास्पद आदेश ऑफिस की कार्यसंस्कृति पर करारा तमाचा है।
इस आदेश से साफ जाहिर है कि EE की न तो नेतृत्व क्षमता है और न ही कर्मचारियों पर कोई प्रभाव। अगर कर्मचारियों में भरोसा और टीम भावना होती, तो ऐसे काम मौखिक रूप से भी कराए जा सकते थे। इससे यह प्रतीत होता है कि पूरा सिस्टम भगवान भरोसे चल रहा है, जहां अधिकारी अपने पद की गरिमा के विपरीत आचरण कर रहे हैं।
अब डर इस बात का है कि अगर आज चावल मंगाया जा रहा है, तो कल कहीं रात में जागरण करवाने का आदेश न आ जाए। जब एक टेक्नोक्रेट ऐसे निर्णय लेता है, तो आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है? यह मामला पूरे विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।
