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नई दिल्ली

उत्तराखंड के स्कूलों में अब गूंजेंगे गीता के श्लोक, CM धामी ने किया अनिवार्य

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य कर दिया है। अगले सत्र से रामायण और गीता पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की घोषणा की है। सरकार ने अब प्रदेश के स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य कर दिया है। सीएम धामी ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन से जोड़ना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए साझा किया कि इससे छात्रों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
शिक्षा विभाग ने इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। अब शिक्षकों को समय-समय पर न केवल गीता के श्लोकों का पाठ करना होगा, बल्कि उनकी व्याख्या भी करनी होगी। विभाग का मानना है कि गीता के सिद्धांत छात्रों में नेतृत्व कौशल, निर्णय क्षमता, भावनात्मक संतुलन और वैज्ञानिक सोच विकसित करने में सहायक होंगे। यह उपदेश सांख्य, मनोविज्ञान और व्यवहार विज्ञान पर आधारित हैं, जो धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण से संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण को राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) में शामिल कर लिया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार, नए पाठ्यक्रम को अगले शिक्षा सत्र से लागू करने की तैयारी है। शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन के विज्ञान और मनोविज्ञान का उत्कृष्ट ग्रंथ है, जो छात्रों को श्रेष्ठ नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
अपने संदेश में सीएम धामी ने अल्मोड़ा के ऐतिहासिक कटारमल सूर्य मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह कत्यूरी काल की वास्तुकला हमारी विरासत है, उसी तरह हमारी सांस्कृतिक परंपराएं भी छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत होनी चाहिए। सरकार की इस घोषणा के बाद राज्य के शैक्षणिक ढांचे में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का संगम देखने को मिलेगा।

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