Connect with us

उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में रोप-वे परियोजनाओं पर सरकार सख्त, कैंचीधाम के लिए भी Ropeway की तैयारी!

Published

on

खबर शेयर करें 👉

उत्तराखंड सरकार ने रोप-वे परियोजनाओं के लिए स्पष्ट नीति तय की। 50 में से 6 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं पर फोकस। काठगोदाम-हनुमानगढ़ी रोप-वे में कैंचीधाम को शामिल करने के निर्देश। जानें नई नीति और निर्माण की चुनौतियां।

देहरादून। उत्तराखंड में रोप-वे परियोजनाओं के निर्माण और संचालन को लेकर सरकार ने अब एक स्पष्ट नीति निर्धारित कर दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब प्रदेश में बनने वाले हर रोप-वे प्रोजेक्ट को अनिवार्य रूप से ‘रोप-वे विकास संचालन समिति’ से स्वीकृति लेनी होगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों के प्रोजेक्ट्स में होने वाले दोहराव को रोकना है और कार्य में एकरूपता लाना है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि रोप-वे विकास समिति की पहली बोर्ड बैठक इस माह के अंत तक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए पर्यटन सचिव को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। एनएचएलएमएल (NHLMCL) को भी जल्द से जल्द एसपीवी के सीईओ की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि दिसंबर के अंत तक पहली बोर्ड बैठक हो सके। इसका सीधा मतलब है कि अब रोप-वे निर्माण में समयबद्ध मॉनिटरिंग और तेजी पर जोर दिया जाएगा।
प्रदेशभर से कुल 50 रोप-वे प्रस्ताव सामने आए हैं, जिनमें से प्राथमिकता के आधार पर 6 प्रमुख परियोजनाओं का चयन किया गया है। इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोप-वे शामिल हैं, जिनका कार्य आबंटित हो चुका है। इसके अलावा, काठगोदाम-हनुमानगढ़ी (नैनीताल) परियोजना अनुमोदन चरण में है, और कनकचौरी-कार्तिक स्वामी की डीपीआर तैयार की जा रही है। उत्तरकाशी और जोशीमठ में भी परियोजनाओं पर टेंडर प्रक्रिया जारी है।
मुख्य सचिव ने इन 6 प्रमुख परियोजनाओं पर फोकस करने और सोनप्रयाग-केदारनाथ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए हर चरण की स्पष्ट टाइमलाइन और पर्ट चार्ट (PERT Chart) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वन एवं वन्यजीव स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने को भी कहा। साथ ही एक बड़ी चुनौती की ओर ध्यान दिलाया गया: रोप-वे निर्माण के लिए भारी मशीनरी साइट तक पहुंचाना। इसके लिए सड़कों का टर्निंग रेडियस बढ़ाने और पुलों को मजबूत करने जैसे अग्रिम कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए।
सबसे महत्वपूर्ण निर्देश कैंचीधाम को लेकर दिए गए। मुख्य सचिव ने काठगोदाम-हनुमानगढ़ी रोप-वे परियोजना में कैंचीधाम को भी शामिल करने के लिए कहा। बढ़ती श्रद्धालु भीड़ को देखते हुए कैंचीधाम के लिए अलग से रोप-वे की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं, जो पर्यटन और तीर्थाटन के लिए बड़ा कदम होगा।

यह भी पढ़ें 👉  केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के लिए मारामारी, पहली कक्षा के लिए सीटों के मुकाबले चार गुना से ज्यादा पंजीकरण

Select Language

Advertisement