नैनीताल
नैनीताल में ओलावृष्टि का कहर: ओखलकांडा और रामगढ़ में फसलें बर्बाद, किसान बेहाल
नैनीताल के ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ में भारी ओलावृष्टि से गेहूं, आलू और मटर की फसलें नष्ट। कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने प्रशासन को दिए मुआवजे के निर्देश।
नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में रविवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट बदली। ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ ब्लॉक के कई गांवों में भारी बारिश के साथ भीषण ओलावृष्टि हुई। इस प्राकृतिक आपदा ने खेतों में खड़ी गेहूं, आलू और मटर जैसी मुख्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
भीड़ापानी, खुजेठी और नरतोला जैसे क्षेत्रों में ओलों की मार सबसे अधिक रही। स्थानीय किसानों के अनुसार, इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अचानक हुई इस ओलावृष्टि ने सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में लगी गोभी, टमाटर और शिमला मिर्च की पौध भी पूरी तरह नष्ट हो गई है।
खुजेठी के किसान हरेंद्र पडियार और हर्ष चोसली ने बताया कि ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि फसलों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। नरतोला के किसान गणेश मेलकानी ने दुखी मन से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एकमात्र साधन खेती ही है। अब फसल बर्बाद होने से परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए। मंत्री ने कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार कर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पर्वतीय काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। अब सभी की निगाहें सरकारी मदद और मुआवजे की प्रक्रिया पर टिकी हैं। किसानों ने मांग की है कि आकलन निष्पक्ष हो ताकि असली प्रभावितों को राहत मिल सके।
