देहरादून
हरीश रावत का विरोधियों को करारा जवाब: ‘हार-जीत में सदाबहार हूं, गोले दागना बंद करें’
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ‘अर्जित अवकाश’ पर उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर चुप्पी तोड़ी है। जानें उन्होंने अपनी हार और मत प्रतिशत पर क्या कहा।
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपने ‘अर्जित अवकाश’ (Earned Leave) को लेकर हो रही आलोचनाओं पर तीखा पलटवार किया है। रावत ने स्पष्ट किया कि 15 दिनों का यह अवकाश उनके सामाजिक दायित्वों को पूरा करने का एक तरीका है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ लोग उन पर ‘दनादन गोले’ बरसा रहे हैं, जिनमें उनके अपने दलीय साथी और विपक्षी दोनों शामिल हैं।
हरीश रावत ने हमलावर होते हुए कहा कि उन पर निशाना साधने वाले तीन तरह के लोग हैं। पहले वो कांग्रेस के साथी हैं जो उनके अवकाश को अपराध मान रहे हैं। रावत ने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ लोगों ने 2022 के चुनाव में उनके खिलाफ AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का सहारा लेकर ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ जैसे झूठे नैरेटिव सेट किए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी साक्ष्य उनके पास आज भी सुरक्षित हैं।
दूसरे वर्ग में उन्होंने उन लोगों को रखा जो कांग्रेस के कट्टर आलोचक और भाजपा समर्थक हैं। रावत ने कटाक्ष किया कि जो लोग उन्हें ‘कांग्रेस पर भार’ बता रहे हैं, उन्हें अचानक कांग्रेस की इतनी चिंता क्यों होने लगी है? उन्होंने मुस्लिम टोपी पहनने के विवाद पर कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक विभिन्न अवसरों पर मुस्लिम समुदाय का सम्मान स्वीकार करते रहे हैं, लेकिन केवल उन्हें ही निशाना बनाया जाता है।
तीसरे वर्ग में बदलाव की इच्छा रखने वाले अपने दोस्तों को संबोधित करते हुए रावत ने अपने चुनावी प्रदर्शन के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2017 और 2022 के चुनावों में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस का मत प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा, “2024 में हरिद्वार लोकसभा सीट पर हार के बावजूद हमें 4.87 लाख से अधिक वोट मिले, जो उत्तरी भारत की हारी हुई सीटों में एक रिकॉर्ड है।” रावत ने अंत में आत्मविश्वास से कहा कि वह हार और जीत दोनों में ‘सदाबहार’ सिपाही हैं।
