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हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाले की जांच पूरी — दो IAS और एक PCS अधिकारी समेत 11 पर कार्रवाई की संस्तुति, करोड़ों का नुकसान उजागर

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देहरादून। हरिद्वार नगर निगम में हुए बहुचर्चित जमीन घोटाले की जांच पूरी हो गई है। जांच अधिकारी सचिव रणवीर सिंह चौहान ने इस मामले में अपनी विस्तृत रिपोर्ट गुरुवार को सचिव शहरी विकास नितेश झा को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक, इस रिपोर्ट में दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 11 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हरिद्वार में गार्बेज डंपिंग यार्ड (कूड़ा एकत्र करने की जगह) के विस्तारीकरण के लिए जमीन की खरीद प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। न तो पारदर्शिता बरती गई और न ही नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किया गया। इसके चलते राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

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सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 54 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन की वास्तविक कीमत 15 करोड़ रुपये भी नहीं थी। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सेक्शन 143 के तहत कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलकर उसे कॉमर्शियल भूमि में तब्दील कर दिया गया। इस प्रक्रिया को केवल छह दिन में पूरा कर लिया गया, जबकि आमतौर पर इसमें महीनों लगते हैं। इसके कारण पांच हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर वाली जमीन की कीमत को 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक बढ़ा दिया गया, जो पूरी तरह विकसित कॉमर्शियल भूमि का रेट है।

रिपोर्ट में तत्कालीन हरिद्वार डीएम कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त और वर्तमान अपर सचिव स्वास्थ्य वरुण चौधरी, एसडीएम अजय वीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार, प्रशासनिक अफसर, अभियंता, लिपिक, पटवारी और डाटा एंट्री ऑपरेटर की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। जांच अधिकारी ने इन सभी पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है।

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जांच रिपोर्ट के अनुसार, जमीन खरीद प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के चलते राज्य को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकारी धन का दुरुपयोग कर नियमों की अनदेखी की। सचिव शहरी विकास नितेश झा ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है और आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

अब देखना होगा कि इस मामले में सरकार किस स्तर पर कार्रवाई करती है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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