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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में मलिन बस्तियों का मुद्दा: अध्यादेशों का दौर जारी, समाधान अभी दूर

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देहरादून: उत्तराखंड में मलिन बस्तियों के सुधार और नियमितीकरण का मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। प्रदेश सरकार ने इस मुद्दे पर लगातार तीन बार अध्यादेश जारी किए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
क्या है मामला?
उत्तराखंड में 582 मलिन बस्तियां हैं। इनमें रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ता है। नैनीताल हाईकोर्ट ने इन बस्तियों को अवैध घोषित करते हुए इन्हें हटाने के आदेश दिए थे। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने 2016 में पहली बार अध्यादेश जारी किया था। इस अध्यादेश में मलिन बस्तियों को तीन श्रेणियों में बांटकर उनके पुनर्वास या नियमितीकरण का प्रावधान किया गया था।
अध्यादेशों का दौर
हालांकि, इस अध्यादेश के बावजूद कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके बाद 2018 और 2021 में भी सरकार ने इसी तरह के अध्यादेश जारी किए। अब 2024 में एक बार फिर तीन साल के लिए अध्यादेश जारी किया गया है।
क्यों नहीं मिल रहा समाधान?
* सर्वे का अभाव: अभी तक सभी मलिन बस्तियों का सर्वे पूरा नहीं हो पाया है। जिसके कारण बस्तियों को श्रेणियों में बांटने में दिक्कत आ रही है।
* अधिसूचना में देरी: सर्वे के बाद भी कई बस्तियों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है।
* राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव: इस मुद्दे पर राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव भी एक बड़ी समस्या है।
* न्यायिक बाधाएं: नैनीताल हाईकोर्ट के आदेशों के कारण भी इस मुद्दे का समाधान जटिल हो गया है।
अब तक क्या हुआ?
अभी तक केवल 155 मलिन बस्तियों को अधिसूचित किया गया है। इनमें से अधिकांश बस्तियां हरिद्वार और नैनीताल जिले में हैं। अन्य जिलों में बहुत कम बस्तियां अधिसूचित की गई हैं।
आगे का रास्ता क्या?
मलिन बस्तियों के मुद्दे का समाधान निकालने के लिए सरकार को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
* सर्वे को पूरा किया जाए: सभी मलिन बस्तियों का सर्वे जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
* अधिसूचना प्रक्रिया को तेज किया जाए: सर्वे के बाद बस्तियों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाना चाहिए।
* पुनर्वास और नियमितीकरण के लिए ठोस योजना बनाई जाए: अधिसूचित बस्तियों के पुनर्वास और नियमितीकरण के लिए एक ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।
* राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए: इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
* न्यायपालिका के साथ समन्वय: न्यायपालिका के साथ समन्वय स्थापित कर इस मुद्दे का समाधान निकाला जाना चाहिए।

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