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उत्तराखण्ड

केदारनाथ धाम के कपाट हुए बंद, बाबा केदार की डोली रवाना

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रुद्रप्रयाग। आज रविवार को भैयादूज के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सुबह 8:30 बजे विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट बंद किए गए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए।
बाबा केदार की डोली रवाना:
केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली धाम से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर गई। डोली पैदल मार्ग से गौरीकुंड, सोनप्रयाग होते हुए रामपुर पहुंचेगी। 5 नवंबर को ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी।
यमुनोत्री धाम के कपाट भी होंगे बंद:
आज ही दोपहर 12:05 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। शीतकाल में यमुना जी की उत्सव मूर्ति खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर में विराजमान रहेगी।
शनिवार से शुरू हुई थी कपाट बंद करने की प्रक्रिया:
शनिवार को केदारनाथ धाम में कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। भगवान केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति को भंडार से बाहर लाया गया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़:
कपाट बंद होने से पहले हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
अधिकारियों का रहा उपस्थित:
इस अवसर पर बीकेटीसी के सीईओ विजय प्रसाद थपलियाल, प्रभारी अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान, केदारसभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, पूर्व अध्यक्ष विनोद शुक्ला, सामाजिक कार्यकर्ता देवानंद गैरोला, अरविंद शुक्ला, प्रदीप शुक्ला आदि मौजूद थे।
श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का बयान:
श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि रविवार को तड़के 4 बजे से कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू की गई। भगवान आशुतोष के ज्योतिर्लिंग को समाधिरूप दिया जाएगा।
यमुनोत्री धाम में भी होगी समान प्रक्रिया:
यमुनोत्री धाम में भी कपाट बंद करने की समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी। खरसाली से शनि देव की डोली अपनी बहन यमुना को लेने के लिए धाम की ओर प्रस्थान करेगी।

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