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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

एक विद्यालय का लहराया परचम : जूहा कमतोली के ग्रामीणों ने बच्चों, शिक्षकों का सम्मान किया

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पिथौरागढ। जनपद में हाईस्कूल स्तर के विद्यालयी बच्चों में विभिन्न स्तरों पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में जूनियर हाईस्कूल कमतोली के बच्चों ने ऐसा अभिनव प्रदर्शन किया कि यह स्कूल पूरे जनपद और प्रदेश में चर्चित हो गया।
बाल वैज्ञानिकों की चर्चा पिथौरागढ जनपद के शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गई है। इन बच्चों और शिक्षकों का एक समारोह में अभिनंदन किया गया है और इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए अनुकरणीय उदाहरण बताया गया है।
सीमांत पिथौरागढ जनपद के कनालीछीना विकास खण्ड के राजकीय जूनियर हाईस्कूल कमतोली के छात्र-छात्राएं जिला स्तरीय सीमान्त बाल विज्ञान महोत्सव एवं विज्ञान महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर राज्य स्तर के लिए चयनित हुए हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापक श्रीमती लीला धामी, विज्ञान शिक्षक डा.सी.बी.जोशी ने बताया कि विद्यालय के सात बच्चे राज्य की प्रतियोगिता में भाग लेंगे। डा.जोशी के मार्गदर्शन में जलवायु परिवर्तन पर पलक भट्ट कक्षा 7 की विज्ञान कविता – ‘ बदलि ग्यो मौसम कुंछा ‘व जलवायु परिवर्तन के कारण – कारक व प्राकृतिक जल स्रोतों के प्रति संवेदीकरण शीर्षक आधारित अंशू भट्ट कक्षा 6 विज्ञान माडल व विज्ञान महोत्सव में नाट्य मंचन -‘सौदागर आयो रे ‘ में राशि , मनीषा , पीयूष, सुनीता एवं गुड्डी राज्य में प्रतिभाग करेंगे।
अल्लेखनीय है कि विगत वर्षो से इस सुदूरवर्ती क्षेत्र से बच्चे लगातार विज्ञान की प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर तक प्रतिभाग करते आ रहे हैं। गत वर्ष सीमान्त जनपद बाल विज्ञान महोत्सव में विज्ञान कविता वाचन प्रतियोगिता में कक्षा 8 की छात्रा कु. निशा ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
इस वर्ष विद्यालय में अध्ययनरत सात बच्चों का चयन राज्य स्तर पर होने पर विद्यालय प्रबन्धन समिति की अध्यक्ष सरोज भट्ट, शिक्षिका रमा बिष्ट अभिभावक कैप्टन जगदीश भट्ट, बसन्त भट्ट, नरेश भट्ट, विजयलक्ष्मी देवी, प्रकाश राम , रेनू देवी , आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर बाल वैज्ञानिकों व मार्गदर्शक शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनायें दी हैं ।
स्थानीय सार्वजनिक स्थल पर इन बच्चों को यह महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचाने वाले शिक्षकों और बच्चों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों को यदि शैक्षणिक और सह शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके तो एक ही स्कूल में इतना बेहतरीन परिणाम प्राप्त हो सकता है।

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