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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

अनुसूचित जाति आयोग अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन, उत्पीड़न और अधिकारों को लेकर उठाई आवाज

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अल्मोड़ा। उत्तराखण्ड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के अल्मोड़ा आगमन पर अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों ने एक मंगपत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने समाज की विभिन्न समस्याओं को उजागर करते हुए तत्काल कार्यवाही की मांग की।

ज्ञापन में सबसे पहले ग्राम मल्ली नाली के देवाटाना तोक में अनुसूचित जाति के लोगों की पेयजल लाइन को तोड़कर अन्य लोगों को “घर-घर नल, घर-घर जल” योजना के अंतर्गत जल आपूर्ति करने के प्रयासों की शिकायत की गई। प्रतिनिधियों ने इस उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच कराकर प्रभावित परिवारों को तत्काल जल सुविधा बहाल कराने का अनुरोध किया।

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दूसरा मुद्दा नौकरियों में अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में कम अंक दिए जाने और “एनएफएस” लिखने की शिकायत रही। उन्होंने पारदर्शिता हेतु साक्षात्कार प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग की मांग की, जिससे न्यायसंगत नियुक्तियाँ सुनिश्चित हो सकें।

ज्ञापन में आगे कहा गया कि अनुसूचित जाति के भूमिहीन परिवारों को बेनाप भूमि एवं तराई क्षेत्र की शीलिंग भूमि आवंटित की जानी चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी विभागों में बैकलॉग पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग भी की गई।

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शिक्षा के क्षेत्र में, स्कूलों में अनुसूचित जाति के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने एवं उच्च शिक्षा में स्कॉलरशिप हेतु आय सीमा समाप्त करने की मांग की गई।

ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से नारायण राम एडवोकेट, बन एडवोकेट, हरीराम टम्टा आदि लोग उपस्थित रहे। उनका कहना है कि इन मांगों पर कार्यवाही से पर्वतीय क्षेत्र के अनुसूचित जाति के लोगों को सशक्त किया जा सकेगा।

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