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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

बागेश्वर में मिली रहस्यमयी गुफा, शिवलिंगों से निकलती दूध जैसी धाराएं; सतयुग से जुड़ा इतिहास!

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बागेश्वर के धारी-डोबा गांव के पास एक प्राचीन रहस्यमयी गुफा मिली है। गुफा के भीतर शिवलिंगों से दूध जैसी सफेद धाराएं बह रही हैं। जानें इसका पौराणिक महत्व और संरक्षण की मांग।

बागेश्वर। जनपद के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र धारी-डोबा गांव के पास एक प्राचीन रहस्यमयी गुफा मिली है, जो इन दिनों स्थानीय लोगों की आस्था और पर्यटकों की जिज्ञासा का मुख्य केंद्र बनी हुई है। इस गुफा की सबसे खास बात यह है कि इसके भीतर से निरंतर दूध जैसी सफेद धाराएं बहती हुई प्रतीत हो रही हैं।
शिवलिंगों से निकलती हैं दूध की धाराएं
गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से कई शिवलिंग बने हुए हैं, और इन्हीं से यह धाराएं लगातार बह रही हैं। गुफा में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को ठंडी हवा का झोंका महसूस होता है। साथ ही, गुफा की दीवारों पर प्राकृतिक रूप से बनी आकृतियाँ भक्तों को श्रद्धा और विस्मय से भर देती हैं। गुफा के अंदर कई संकरे रास्ते हैं, जो आगे चलकर एक विशाल गुंबदाकार हॉल में खुलते हैं। यह गुफा अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के कारण पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही है।
सतयुग से जुड़ी है स्थानीय किंवदंती
गांव के बुजुर्ग हर सिंह बताते हैं कि यह गुफा अत्यंत प्राचीन है और संभवतः सतयुग काल की मानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार, सतयुग में एक संत बाबा यहां तपस्या करने आए थे। कहा जाता है कि उन्होंने इसी गुफा में खीर बनाई थी, जिसके बाद से पत्थरों से यह दूध जैसी सफेद धाराएं बहने लगीं। यह अदभुत और विस्मयकारी दृश्य आज भी यहां देखा जा सकता है।
ग्रामवासियों ने कई बार प्रशासन से इस गुफा के संरक्षण और विकास की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि गुफा तक पहुँचने के लिए सड़क, रोशनी तथा अन्य बुनियादी सुविधाएँ जैसे सीढ़ियां विकसित की जाएं, तो यह स्थान पूरे जिले का एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल बनकर उभर सकता है।

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