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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में निराश्रित पशुओं के लिए नई SOP: हाईवे और शहरों से हटेंगे आवारा जानवर

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उत्तराखंड सरकार ने हाईवे और सार्वजनिक स्थानों से निराश्रित पशुओं को हटाने के लिए SOP जारी की है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए हेल्पलाइन 1905 और नए डॉग शेल्टर का होगा निर्माण।

देहरादून। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में एक नई मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इसके तहत प्रदेश के सभी नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे और सार्वजनिक स्थानों से निराश्रित पशुओं को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पहली बार 10 से अधिक विभागों को एक साथ मिलकर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें पंचायती राज, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विभाग शामिल हैं। अस्पतालों में एंटी-रैबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, आवारा कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन मॉड्यूल को मजबूती से लागू किया जाएगा।
निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। शहरी विकास सचिव राज्य स्तरीय और जिलाधिकारी जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता करेंगे। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे बड़े जिलों में 100 कुत्तों की क्षमता वाले दो-दो नए डॉग शेल्टर बनाए जाएंगे। इसके अलावा, पशुओं को पकड़ने के लिए समर्पित गश्ती दल और विशेष वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है।
सरकार इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक समर्पित पोर्टल और मोबाइल ऐप भी विकसित करेगी। इस पोर्टल पर प्रदेश के सभी गोसदनों की क्षमता और उनमें उपलब्ध स्थान की लाइव जानकारी मिलेगी। सार्वजनिक स्थानों जैसे बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और शिक्षण संस्थानों को ‘पशु मुक्त’ बनाने के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे। किसी भी सूचना के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1905 भी जारी किया है।

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