Report by : CWN Desk
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नैनीताल-मसूरी जाना अब होगा महंगा! उत्तराखंड सरकार ने बाहरी वाहनों पर ग्रीन सेस लगाने की तैयारी की

उत्तराखंड सरकार नैनीताल और मसूरी समेत पूरे राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों पर ग्रीन सेस लगाने जा रही है। मौजूदा शुल्कों के अलावा 80 से 700 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, पर्यटन प्रभावित होने की आशंका

देहरादून। उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की सैर अब होगी महंगी, सरकार ने बाहरी राज्यों के वाहनों पर ग्रीन सेस लगाने की तैयारी की। उत्तराखंड के दो प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल नैनीताल और मसूरी की यात्रा अब बाहरी राज्यों के पर्यटकों के लिए महंगी होने वाली है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण का हवाला देते हुए उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले दूसरे राज्यों के वाहनों पर ग्रीन सेस लगाने की तैयारी कर ली है। वर्तमान में नैनीताल में प्रवेश शुल्क और मसूरी में इको टैक्स पहले से ही वसूला जा रहा है, लेकिन अब पर्यटकों को दिसंबर से एक और अतिरिक्त शुल्क देना होगा।


नए नियम के तहत, दिसंबर से उत्तराखंड राज्य की सीमा में प्रवेश करते ही पर्यटकों को अपने वाहन के हिसाब से 80 रुपये से लेकर 700 रुपये तक का ग्रीन सेस चुकाना होगा। इसका मतलब है कि दूसरे राज्यों से आने वाले सैलानियों को पहले राज्य की सीमा पर ग्रीन सेस देना होगा, फिर नैनीताल में प्रवेश शुल्क और अंत में पार्किंग के लिए अलग से भुगतान करना पड़ेगा। गौरतलब है कि नैनीताल में जिले से बाहर के वाहनों के लिए प्रवेश शुल्क 300 रुपये और पार्किंग शुल्क 500 रुपये तक है। मसूरी नगर पालिका भी 12 से 180 रुपये तक का इको टैक्स लेती है, जिसमें केवल मसूरी, टिहरी और उत्तरकाशी के वाहनों को छूट मिलती है।
राज्य सरकार के इस कदम का स्थानीय व्यापार मंडल और होटल एसोसिएशन विरोध कर रहे हैं। तल्लीताल व्यापार मंडल के अध्यक्ष मारुति नंदन साह का कहना है कि पर्यटक पहले से ही पार्किंग और चुंगी के रूप में बड़ी रकम चुका रहे हैं। ऐसे में ग्रीन सेस लगने से उनका बोझ बढ़ेगा और इससे पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ेगा। होटल एसोसिएशन के महासचिव वेद साह ने भी आशंका जताई है कि भले ही 80 रुपये कम लगें, लेकिन जब यह शुल्क बाकी शुल्कों के साथ जुड़ेगा, तो पर्यटकों को उत्तराखंड का सफर महंगा लगेगा।
उधर, मसूरी में पालिका ने शहर के सौंदर्यीकरण और स्वच्छता के लिए 2010 में इको टैक्स शुरू किया था। पहले यह टैक्स नगर पालिका खुद वसूलती थी, लेकिन अब इसे पीपीपी मोड (PPP Mode) पर दे दिया गया है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक इस टैक्स से करीब ढाई करोड़ रुपये का कलेक्शन हो चुका है, जिसका उपयोग शहर के स्वच्छता और सौंदर्यीकरण कार्यों पर किया जा रहा है।

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