देहरादून
जनता का विश्वास ही पूंजी: चिंतन शिविर में CM धामी ने अफसरों को दिया सुशासन और जवाबदेही का मंत्र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘डॉयलॉग ऑन विजन 2047’ चिंतन शिविर का उद्घाटन किया। अधिकारियों को सुशासन, तकनीक और जवाबदेही के साथ जनसेवा का संदेश दिया।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को राजपुर स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में ‘चिंतन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047’ का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता का विश्वास ही प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने अफसरों से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का एक सुनहरा अवसर मानकर कार्य करें।
लालफीताशाही पर प्रहार और जवाबदेही की मांग
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी कामकाज में होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अक्सर लालफीताशाही के कारण महत्वपूर्ण कार्य रुक जाते हैं और जनता की आवाज अनसुनी रह जाती है। सीएम धामी ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थितियां प्रशासन की छवि को धूमिल करती हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि हर निर्णय समय पर होना चाहिए और योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी चाहिए। सुशासन का अर्थ केवल कागजी नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह होना है।
विकसित उत्तराखंड के तीन मुख्य स्तंभ
मुख्यमंत्री ने ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए तीन प्रमुख आधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की नींव सुशासन, तकनीक एवं नवाचार, और जन केंद्रित सतत विकास पर टिकी है। हिमालयी राज्य होने के नाते, यहाँ विकास और पर्यावरण के बीच सटीक संतुलन बनाना अनिवार्य है। उन्होंने नीति आयोग और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की कि वे ऐसी नीतियां बनाएं जो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक लाभ पहुँचा सकें।
मंच छोड़ अफसरों के बीच बैठे मुख्यमंत्री
शिविर के दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। अपने संबोधन के बाद वे मंच पर बैठने के बजाय हॉल की पहली पंक्ति में सामान्य अधिकारियों के साथ बैठ गए। विजन 2047 के विभिन्न सत्रों के दौरान वे न केवल मौजूद रहे, बल्कि विशेषज्ञों द्वारा दिए जा रहे सुझावों और मुख्य बिंदुओं को अपनी डायरी में नोट भी करते रहे। उनकी इस सादगी और सीखने की ललक ने शिविर में मौजूद सभी अधिकारियों और नीति आयोग के प्रतिनिधियों को प्रभावित किया।
