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हरिद्वार

मिथिला के तीर्थ पुरोहित शैलेश मोहन ने किया सद्भावना यात्रा का भव्य स्वागत

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दरभंगा के 7 सदस्यीय कांवड़ यात्रियों का दल लगातार 11 दिन में 300 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर पहुंचा हरिद्वार

हरिद्वार। विश्व में शांति एवं सद्भावना की स्थापना के उद्देश्य से गंगोत्री से रामेश्वरम की पैदल कांवड़ यात्रा के हरिद्वार पहुंचने पर मिथिला के तीर्थ पुरोहित शैलेश मोहन ने भव्य स्वागत किया। उन्होंने यात्रा में शामिल लोगों को मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग एवं पटका भेंटकर सम्मानित किया। साथ ही यात्रियों के ठहरने खाने-पीने भी व्यापक प्रबंध किया ।

बताते चलें कि मिथिला के दरभंगा रेडियो स्टेशन के संचालक और भारत सरकार के चुनाव आयोग के आइकॉन मणिकांत झा अपने साथियों के साथ गंगोत्री से जल के 3300 किलोमीटर आगे रामेश्वरम तक सद्भावना पैदल पद यात्रा पर निकले हैं। बुधवार को हरिद्वार पहुंचने पर मिथिला के तीर्थ पुरोहित पंडित शैलेश मोहन ने मिथिला की परंपरा और विधि विधान के अनुसार पाग चादर भेंटकर सम्मानित किया और साथ मे गंगा मैया की विशेष आरती पूजन की व्यवस्था के साथ ठहरने और खाने -पीने की व्यवस्था भी की। साथ मे पंडित अभिनव झा भी मौजूद रहें।
गौरतलब है कि सद्भावना यात्रा पर निकला मिथिला (दरभंगा) के 7 सदस्यीय कांवड़ यात्रियों का दल लगातार 11 दिन करीब 300 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हुए बुधवार को हरिद्वार पहुंचा। हरिद्वार में ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून एवं इसके आसपास रहने वाले प्रवासी मित्रों ने भी यात्रियों का भव्य स्वागत किया। स्वागत करने वालों में रोहित, मनीष कुमार झा, अभिनव कुमार झा, गार्गी, मनीष, चंदन कुमार झा, आमोद झा, अनुभव चोपड़ा, संदीप झा, सौरभ झा आदि शामिल रहे कांवड़ यात्रा का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार यात्रा का अनुभव बताते हुए कहा कि सद्भावना यात्रा में पहाड़ की चढ़ाई करते हुए यात्रा का अपना अलग ही आनंद है। पैदल यात्रा जिस ओर चलती है, गंगा मैया साथ में बहती है। में चलती है। यात्रा दल में शुभंकरपुर (दरभंगा) के डॉक्टर बासुकीनाथ झा, हरिना झंझारपुर (मधुबनी) के चिरंजीव मिश्र, विषम टोल कछुआ (दरभंगा) के श्याम राय रतवारा (मुजफ्फरपुर) के आशुतोष कुमार एवं रंजीत कुमार झा सहित हरिनगर (सीतामढ़ी) के सुदेश ठाकुर शामिल है। बता दें कि उत्तराखंड के गंगोत्री से यात्रा प्रारंभ होकर पदयात्री उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ तेलंगाना आंध्र प्रदेश के रास्ते तमिलनाडु के रामेश्वरम तक जाएंगे यात्रा के क्रम में कांवड़ यात्रा की कला संस्कृति सभ्यता और भाषा आदि को प्रसारित करने का साथ ही कला संस्कृति से भी परिचित होंगे।

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