Connect with us

नई दिल्ली

साँप के संँपोलिये छोड़े नहीं जाते

Published

on

खबर शेयर करें 👉

आस्तीन में पलने वालों,
बोलो कितना और पलोगे?
मूंग वक्ष पर दलने वालों,
बोलो कितना और दलोगे?
बाहर से दिखते हो चंगे,
पर भीतर से सुलग रहे हो।
बिना बात के जलने वालों,
बोलो कितना और जलोगे?

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के इन गांवों में सूखा नशा की खरीद-फरोख्त पर लगेगा जुर्माना, पंचायत में फैसला

रिश्ते अग़र हों खास तो तोड़े नहीं जाते
हर किसी से तार भी जोड़े नहीं जाते
अपना कहें और पीठ पीछे घात भी करें
तो साँप के सँपोलिये छोड़े नहीं जाते।

यह भी पढ़ें 👉  रेरा आंदोलन खत्म नहीं हुवा है, 5 अक्टूबर तक धरना स्थगित कर रहे हैं समाप्त नही : बलजीत सिंह

देवेश द्विवेदी ‘देवेश

Select Language

Advertisement