Connect with us

नई दिल्ली

वक्त

Published

on

खबर शेयर करें 👉

जिन्दगी का एक लम्हा,आज फिर निकल गया।

वक्त था आया हाँथ में,पर रेत सा फिसल गया।

हैं हसरतें जो दिल में, आज भी तुझसे सनम।

यह भी पढ़ें 👉  विधेयक में महिलाओं को समान अधिकार का प्रविधान, विधिक प्रक्रिया से ही होगा विवाह-विच्छेद

ये फासला ही उसे, देखो नाग सा निगल गया।

डॉ. कल्पना कुशवाहा ‘ सुभाषिनी ‘

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Select Language

Advertisement