Connect with us

अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

20 हजार की रिश्वत लेते दो फॉरेस्ट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, विजिलेंस का बड़ा एक्शन!

Published

on

खबर शेयर करें 👉

उत्तराखंड के चम्पावत में विजिलेंस टीम ने लकड़ी पास के बदले ₹20,000 रिश्वत लेते हुए दो फॉरेस्ट गार्ड (दीपक जोशी और भुवन भट्ट) को गिरफ्तार किया है। जानें गोशाला निर्माण की लकड़ी से जुड़ा पूरा मामला और क्या है उन पर आरोप।

चम्पावत। जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आई है। विजिलेंस टीम ने शनिवार को Mosta चेक पोस्ट पर तैनात दो फॉरेस्ट गार्डों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी फॉरेस्ट गार्डों पर लकड़ी का पास बनाने के एवज में ₹20,000 की मांग करने का आरोप है। विजिलेंस ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई उत्तराखंड में फैले भ्रष्टाचार पर एक बड़ा प्रहार है।

यह भी पढ़ें 👉  पुलिस की दहशत, पांच आरोपियों ने चौकी पहुंचकर किया सरेंडर


पूरा मामला एक स्थानीय व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता को अपनी गोशाला के निर्माण के लिए लकड़ी चाहिए थी। उसने जंगल में टूटे चीड़ के पेड़ को ले जाने के लिए फॉरेस्ट गार्ड दीपक जोशी (निवासी लटोली) और भुवन भट्ट (निवासी जूप) से संपर्क किया था। लकड़ी ले जाने के बाद, दोनों गार्डों ने शिकायतकर्ता के वाहन को पकड़ लिया। उन्होंने डरा-धमकाकर उससे ₹40,000 की मोटी रकम की मांग की, जबकि पास के बदले ₹20,000 देने की बात हुई थी।
शिकायतकर्ता ने इसकी पूरी जानकारी विजिलेंस टीम को दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ने तुरंत एक जाल बिछाया। शनिवार को विजिलेंस टीम ने चम्पावत के कोतवाल बची सिंह बिष्ट के साथ मिलकर कार्रवाई की। जैसे ही दोनों फॉरेस्ट गार्ड ने शिकायतकर्ता से रिश्वत के ₹20,000 लिए, विजिलेंस टीम ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया। यह ऑपरेशन अत्यंत गोपनीय ढंग से पूरा किया गया।
इस मामले पर विजिलेंस टीम ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी सरकारी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। गिरफ्तार हुए दोनों गार्डों से अब गहन पूछताछ की जा रही है। इस घटना से वन विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने कहा कि सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल न हो। यह गिरफ्तारी दिखाती है कि विजिलेंस टीम ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता (Zero tolerance) की नीति पर काम कर रही है।

Select Language

Advertisement