Connect with us

नई दिल्ली

समझदार का काम नहीं

Published

on

खबर शेयर करें 👉

सुख के आने पर इतराना
खुश होना और जश्न मनाना,
समझदार का काम नहीं है
दुख पाकर विचलित हो जाना,
दुख का आना,हमें सताना
यह तो बस चलते रहना है,
फिर दुख की काली छाया से
क्या डरना और क्या घबराना?
फिर भी कभी जो मन उदास हो
याद मुझे थोड़ा कर लेना,
तुमको हिम्मत मिल जाएगी
मेरी यह कविता दोहराना।

यह भी पढ़ें 👉  सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए सैंपल प्रश्नपत्र और मार्किंग स्कीम जारी की

देवेश द्विवेदी ‘देवेश’

Select Language

Advertisement