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नई दिल्ली

सामूहिक विवाह से पहले युवतियों का प्रेगनेंसी जांच से सियासी विवाद

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कांग्रेस ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में युवक-युवतियों को बदनाम करने का आरोप लगाया

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के डिंडौरी में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत हुए सामूहिक विवाह पर विवाद खड़ा हो गया है। सामूहिक विवाह से पहले युवतियों का प्रेगनेंसी टेस्ट कराए जाने पर कांग्रेस ने शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में शामिल होने वाले युवक-युवतियों को परेशान और बदनाम किया जा रहा है। शादी से पहले प्रेगनेंसी टेस्ट को बेटियों का ‘अपमान’ कहा जा रहा है।
शनिवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत डिंडोरी जिले के गदासराय में 219 जोड़ों के विवाह होने थे। आरोप है कि इस दौरान मेडिकल टेस्ट के नाम पर महिलाओं के प्रेगनेंसी टेस्ट कराए गए। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कुछ महिलाओं ने स्त्री रोग संबंधी शिकायतें की थीं, इसके बाद उनकी जांच की गई।
कांग्रेस ने इसे गरीबों का अपमान करार देते हुए जांच की मांग की है। विपक्षी पार्टी की ओर से पूछा गया है कि आखिर किस गाइडलाइन के तहत ये टेस्ट कराए गए? 
उधर, डिंडोरी कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि प्रेगनेंसी टेस्ट को लेकर प्रशासन की ओर से कोई निर्देश नहीं दिए गए थे। लेकिन कार्यक्रम के दौरान कुछ दुल्हनों ने स्त्री रोग संबंधी समस्याओं की शिकायत की थी, इसके बाद उनके टेस्ट किए गए थे।

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