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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड परीक्षाओं के दौरान विरोध-प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों पर लगेगी एस्मा

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अगले साल मार्च 2024 में होनी हैं बोर्ड की परीक्षाएं, सैकड़ों शिक्षकों ने छोड़ा प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व
देहरादून। उत्तराखंड परीक्षाओं के दौरान विरोध-प्रदर्शन आंदोलनों पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगाने जा रहा है। शिक्षा महानिदेशालय ने इसका प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया है। डीजी-शिक्षा बंशीधर तिवारी ने इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि एस्मा की अवधि छह माह रहेगी। अगले साल मार्च 2024 में बोर्ड परीक्षाएं होनी है। शिक्षण कार्य को सुचारू रखने के लिए एस्मा लगाया जाना अनिवार्य है। इसका प्रस्ताव भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार एस्मा का उल्लंघन करने पर छह माह तक की कैद का प्रावधान है। हालांकि एस्मा को हर साल बोर्ड परीक्षाओं के दौरान लागू किया जाता है। लेकिन इस बार विभाग अधिक सक्रिय है। राजकीय शिक्षक संघ के आंदोलन की वजह से आशंका है कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान आंदोलन किया जा सकता है। राजकीय शिक्षक संघ प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों का संगठन है। जो कि सीधा-सीधा नवीं से 12 वीं कक्षा तक जुड़े हैं। 27 सितंबर से संघ का चरणबद्ध आंदोलन जारी है। इसके आगे और तेज होने की संभावना है।
शैक्षिक सत्याग्रह के तहत प्रदेश के सैकड़ों शिक्षकों ने शुक्रवार को प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व छोड़ दिया। हाईस्कूल और इंटर कालेजों में एक हजार से ज्यादा शिक्षक प्रभारी के रूप में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य का कामकाज देख रहे हैं। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान और महामंत्री रमेश चंद्र पैन्यूली ने कहा कि अब तक प्रदेश के 90 प्रतिशत स्कूलों से शिक्षकों के प्रभार छोड़ने की सूचना प्राप्त हो चुकी है। अब से शिक्षक केवल और केवल पढ़ाई का काम करेंगे। पढ़ाई से इतर कोई दूसरा काम शिक्षक नहीं करेंगे। मालूम हो कि प्रदेश के करीब 1400 इंटर कालेज और 950 हाईस्कूलों में करीब 80 प्रतिशत पद खाली हैं। इन पर स्कूलों के वरिष्ठ एलटी अथवा प्रवक्ता कैडर के शिक्षक प्रभारी के रूप में दायित्व संभाले हुए हैं। चौहान ने कहा कि एक ओर तो शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। साथ ही बोर्ड रिजल्ट के लिए भी उनकी जवाबदेही तय की जा रही है। शिक्षक पिछले कई वर्षों से अपनी मांगों को विभिन्न मंचों पर उठाते आ रहे हैं। लेकिन न तो विभाग की सुन रहा है और सरकार भी संवेदनहीन बनी हुई है। डीजी शिक्षा ने कहा कि प्रभार छोड़ने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी।

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