नई दिल्ली
सीबीएसई स्कूलों में पहली से आठवीं तक अनिवार्य होंगी एनसीईआरटी की किताबें, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी शामिल होगा पाठ्यक्रम में
नई दिल्ली। देशभर के सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में अब पहली से आठवीं कक्षा तक सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएंगी। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर सीबीएसई ने सभी स्कूलों को यह निर्देश जारी किया है, जिससे अब केवल नौंवी से बारहवीं तक ही नहीं, बल्कि शुरुआती कक्षाओं में भी एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य हो जाएंगी।
इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा में समानता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कई निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी और अतिरिक्त किताबें छात्रों पर थोप दी जाती थीं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। नई व्यवस्था से न केवल यह प्रवृत्ति रुकेगी, बल्कि नई शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों के अनुरूप एकरूपता भी आएगी।
इस बीच, एनसीईआरटी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित एक विशेष पाठ्यक्रम मॉड्यूल तैयार करने की घोषणा की है। इसका मकसद छात्रों को भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व से अवगत कराना है। यह मॉड्यूल दो भागों में तैयार किया जाएगा—एक कक्षा तीन से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए और दूसरा कक्षा नौ से बारह तक के लिए।
सूत्रों के मुताबिक, इस विशेष पाठ्यक्रम में पहलगाम हमले पर भारत की रणनीतिक सैन्य प्रतिक्रिया को लेकर 8 से 10 पन्नों का अध्ययन सामग्री शामिल होगी। यह न केवल छात्रों को समकालीन घटनाओं की समझ देगा, बल्कि उनमें देशभक्ति और रक्षा क्षेत्र के प्रति रुचि भी विकसित करेगा। शिक्षा जगत में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है।
