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उत्तराखंड: शादी-समारोह में शराब परोसने पर 51 हज़ार का जुर्माना! ग्रामीणों ने लिया ऐतिहासिक फैसला

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उत्तराकाशी के लोदाड़ा गांव ने शराबबंदी को लेकर कड़ा कदम उठाया है। शादी, मुंडन जैसे कार्यक्रमों में शराब परोसने पर ₹51,000 का जुर्माना लगेगा और सामाजिक बहिष्कार होगा। पहाड़ के गांव की यह पहल क्यों ज़रूरी है, जानें!

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शादी, मुंडन और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शराब का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसने ग्रामीण संस्कृति और युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए, उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लॉक स्थित लोदाड़ा गांव के ग्रामीणों ने स्वयं ही इस पर लगाम लगाने की कमर कस ली है। ग्राम प्रधान कविता बुटोला की अगुवाई में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया है कि अब से शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों में शराब परोसने वाले परिवारों पर 51 हजार रुपए का बड़ा जुर्माना लगाया जाएगा।
🤝 सामाजिक बहिष्कार की भी चेतावनी: गांव ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव किया पारित
ग्राम प्रधान कविता बुटोला, महिला मंगल दल और युवा मंगल दल सहित सभी ग्रामीणों ने एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि विवाह, चूड़ाकर्म संस्कार आदि कार्यक्रमों में किसी भी हाल में शराब नहीं परोसी जाएगी। प्रधान बुटोला ने स्पष्ट किया कि यदि किसी परिवार के यहां इस नियम का उल्लंघन पाया गया, तो उस परिवार पर 51,000 रुपए का जुर्माना दंड के तौर पर लगेगा। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार का पूरा गांव सामाजिक बहिष्कार करेगा। दंडित परिवार भी ग्राम वासियों के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएगा।
😟 विवाद और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित हैं ग्रामीण
पहाड़ के गांव के लोगों का कहना है कि वे अपने बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। उनका मानना है कि अगर शराब का चलन इसी तरह बढ़ता रहा, तो युवा नशे की गिरफ्त में आकर अपराध के दलदल में फंस जाएंगे, जिससे उनके रोज़गार और जीवन की दिशा भटक जाएगी। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पूर्व में गांव में हुए समारोहों में जब-जब शराब परोसी गई, तब अक्सर लड़ाई-झगड़े हुए हैं, जिससे शांति भंग होती है और डर का माहौल बनता है।
🌳 सामुदायिक हित में लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय
गांव के हित और नई पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए ग्राम वासियों ने मिलकर यह कड़ा निर्णय लिया है। यह पहल दिखाती है कि कैसे समुदाय अपनी सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हो सकते हैं। लोदाड़ा गांव का यह फैसला उत्तराखंड शराबबंदी के अभियान को ज़मीनी स्तर पर मज़बूती देगा और अन्य पहाड़ी गांवों को भी इसी तरह के कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगा।

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