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देहरादून

चकराता के बनियाना गांव का ऐतिहासिक फैसला: शादी में केवल 3 गहने और अंग्रेजी शराब पर सख्त रोक!

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उत्तराखंड के चकराता तहसील के बनियाना गांव में सामाजिक परंपराओं को सुदृढ़ बनाने के लिए 6 अहम निर्णय लिए गए हैं। उल्लंघन करने पर ₹1 लाख का जुर्माना और बहिष्कार का प्रावधान। जानें सभी बड़े फैसले।

देहरादून। उत्तराखंड की चकराता तहसील के बनियाना गाँव ने अपनी सामाजिक परंपराओं और व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। स्याणा शूरवीर सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित एक आम बैठक में, सर्वसम्मति से छह महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य फिजूलखर्ची पर लगाम लगाना और सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। इन फैसलों में विवाह और अन्य समारोहों पर कई प्रतिबंध शामिल हैं।
विवाह समारोहों में दो बड़े प्रतिबंध
बैठक में लिए गए फैसलों में दो निर्णय मुख्य रूप से विवाह समारोहों से संबंधित हैं। सबसे पहले, यह तय किया गया है कि अब किसी भी शादी या समारोह में महिलाएं केवल तीन तरह के आभूषण ही पहन सकती हैं, जिनमें फूली, बूंदे या झुमके और मंगलसूत्र शामिल हैं। यह निर्णय शायद अनावश्यक दिखावे को कम करने के लिए लिया गया है। दूसरा महत्वपूर्ण फैसला अंग्रेजी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध का है। समारोहों में अब अंग्रेजी शराब परोसना या इस्तेमाल करना पूरी तरह से वर्जित होगा।
अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक निर्णय
इन फैसलों के अलावा, बैठक में सामाजिक व्यवस्था से जुड़े कई अन्य अहम निर्णय भी लिए गए। रिश्तेदारों के विवाह में केवल एक ही बकरा ले जाने की अनुमति दी गई है, जिससे भोज की अनावश्यक भव्यता पर रोक लगेगी। इसके साथ ही, ‘सवार-बियाई’ न बनाने का निर्णय भी लिया गया। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए देवदार और चीड़ की लकड़ी की बिक्री पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। महिलाओं के लिए ‘रईंटूणी’ (एक तरह की सामाजिक प्रथा) के संबंध में यह तय किया गया है कि वह केवल अपने मायके में होने वाली घटनाओं में ही शामिल हो सकती है।
उल्लंघन पर भारी जुर्माना और बहिष्कार
गाँव की आम बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया कि लिए गए इन निर्णयों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उल्लंघन करने वालों पर एक लाख रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर सामाजिक बहिष्कार जैसे कठोर निर्णय भी लिए जा सकते हैं। इस दौरान भागीराम, मेहर सिंह, कुंदन सिंह, अतर सिंह, महावीर सिंह, हुकम सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह कदम दर्शाता है कि गाँव अपनी परंपराओं और सामूहिक मूल्यों के प्रति कितना गंभीर है।

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