उत्तराखण्ड
‘मैं ढोल हूँ’: हरीश रावत का दावा- जनता परिवर्तन को तैयार; US नगर में 11 पार्षदों का इस्तीफा, कांग्रेस में कलह
पूर्व सीएम हरीश रावत ने सितारगंज में कहा कि वे कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दिलाने के लिए ‘ढोल’ बनकर काम करेंगे। दूसरी ओर, नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष की राह मुश्किल। यूएसनगर में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति से नाराज़ विधायक तिलकराज बेहड़ समर्थकों ने दिया इस्तीफा, पार्टी में गुटबाज़ी फिर चरम पर।
सितारगंज/देहरादून। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में उत्साह और अंदरूनी कलह, दोनों ही चरम पर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सितारगंज में दावा किया कि राज्य की जनता ने अब सरकार परिवर्तन का मन बना लिया है। उन्होंने नवनियुक्त कांग्रेस पदाधिकारियों की ऊर्जा की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वे जनभावनाओं को समझते हुए जनादेश कांग्रेस के पक्ष में मोड़ने में सफल होंगे। संगठन में अपनी भूमिका पर मुस्कराते हुए रावत ने कहा, “पहले मैं ढोल बजाता था, अब मैं खुद ढोल हूँ।” उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश नेतृत्व जो भी भूमिका तय करेगा, वह उसे निभाने को तैयार हैं ताकि पूर्ण बहुमत से कांग्रेस की सरकार बन सके।
रावत का यह आत्मविश्वास भरा बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने पदभार संभालने से पहले ही बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनौती उधम सिंह नगर (यूएसनगर) जिले से आई है, जहां जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधायक तिलकराज बेहड़ के समर्थक रुद्रपुर नगर निगम के 11 पार्षदों ने विरोध स्वरूप सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। बेहड़ का कहना है कि पिछले दो दशक से एक ही परिवार का यूएसनगर कांग्रेस संगठन पर कब्जा है, जिससे ऐसा लगता है कि जिले में कोई दूसरा सक्षम नेता ही नहीं है।
मामले को बिगड़ता देख, नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने तुरंत विधायक बेहड़ से फोन पर संपर्क साधा और उन्हें मनाने की कोशिश की। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी विधिवत रूप से पदभार भी नहीं संभाला है। वहीं, हरीश रावत ने भी सितारगंज में बेहड़ को कांग्रेस का मजबूत स्तंभ बताते हुए उनके सभी सवालों का समाधान करने का आश्वासन दिया है। कांग्रेस के भीतर यह गुटबाज़ी चुनाव से पहले संगठन की एकता के लिए बड़ा खतरा है।
पार्टी नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सामंजस्य बना रहे। एक ओर, हरीश रावत जैसे अनुभवी नेता जनभावनाओं को भुनाने और सरकार बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, क्षेत्रीय स्तर पर हो रहे ये इस्तीफ़े पार्टी की ज़मीनी पकड़ को कमजोर कर सकते हैं। यह देखना होगा कि नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष इस आंतरिक चुनौती से कैसे निपटते हैं और पार्टी को एकजुट कर चुनाव की तैयारी में लगाते हैं।
