नई दिल्ली
हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा: धूमधाम से मना कृष्ण जन्मोत्सव, भजनों पर झूमे भक्त
हरिद्वार के मोतीमहल मंडपम् में आयोजित श्रीमद्भागवत भक्ति यज्ञ के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्य करुणेश मिश्र ने ध्रुव और वामन अवतार की कथा सुनाई।
हरिद्वार: तीर्थ नगरी हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित मोतीमहल मंडपम् में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। अध्यात्म चेतना संघ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत भक्ति यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण का पावन प्रकट्योत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही कथा पंडाल में ‘नन्द घर आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंजे, श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचने और झूमने लगे।
कथा व्यास आचार्य करुणेश मिश्र ने कृष्ण जन्म के प्रसंग से पूर्व ध्रुव चरित्र और प्रहलाद भक्ति की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव की तरह अटूट विश्वास रखने वाले भक्त को भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होते हैं। उन्होंने देवर्षि नारद द्वारा दिए गए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की महत्ता पर प्रकाश डाला और भक्तों को नारायण की अनन्य भक्ति का मार्ग दिखाया।
कथा के दौरान वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने बताया कि कैसे राजा बलि ने अपना सर्वस्व दान कर भगवान को अपना द्वारपाल बना लिया था। इसके बाद माता लक्ष्मी ने रक्षासूत्र के बल पर भगवान को पाताल लोक से मुक्त कराया। इस प्रेरक प्रसंग को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए और पूरे पंडाल में भक्ति का माहौल छा गया।
इस आध्यात्मिक आयोजन में मुख्य रूप से योगाचार्य विशाल शर्मा, संपादक अरुण कुमार पाठक, अशोक सरदार और ब्रजेश शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अध्यात्म चेतना संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कथा का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार करना है। कार्यक्रम के अंत में भगवान की आरती हुई और सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
