Report by : CWN Desk
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हरिद्वार: श्रीमद्भागवत कथा में गूँजी श्रीकृष्ण की लीलाएँ, आचार्य करुणेश ने सिखाया भक्ति का मार्ग

हरिद्वार में अध्यात्म चेतना संघ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य करुणेश मिश्र ने कालिया मर्दन और गोवर्धन लीला के माध्यम से जीवन सुधार के सूत्र बताए।

हरिद्वार। अध्यात्म चेतना संघ के तत्वावधान में ज्वालापुर के मोतीमहल मंडपम् में आयोजित श्रीमद्भागवत भक्ति यज्ञ सप्ताह श्रद्धा और उल्लास के साथ जारी है। कथा के दौरान व्यास पीठ से आचार्य करुणेश मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने वकासुर और अघासुर वध के प्रसंग सुनाते हुए भक्तों को जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश दिए।
अभिमान और पाप से मुक्ति का संदेश
आचार्य करुणेश मिश्र ने कहा कि वकासुर दम्भ का और अघासुर पाप का प्रतीक है। भगवान ने पाप को समाप्त करने से पहले उसके मूल कारण यानी अभिमान को मिटाया है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर की कृपा को स्वीकार करता है, वह परमात्मा को सुगमता से प्राप्त कर लेता है। अपने दुखों को अपने कर्मों का फल मानकर सुधार करना ही सच्ची भक्ति है।
मन की कालिमा दूर करेगी ईश्वर की प्रार्थना
कालिया मर्दन की कथा सुनाते हुए आचार्य ने मनुष्य के अंतर्मन की तुलना यमुना के जल से की। उन्होंने कहा कि जैसे यमुना का जल कालिया नाग के कारण काला हो गया था, वैसे ही हमारा मन भी विकारों से दूषित है। इन विकारों से मुक्ति के लिए निरंतर भगवान का चिंतन और प्रार्थना आवश्यक है। इसके साथ ही कथा में महारास और चीर-हरण प्रसंग के माध्यम से सात्विक जीवन जीने का आह्वान किया गया।
भक्तिमय माहौल में गोवर्धन और रुक्मिणी मंगल संपन्न
कथा के क्रम में इंद्र के अभिमान को चूर करने वाली गोवर्धन लीला और भगवान के रुक्मिणी मंगल प्रसंग ने श्रोताओं को आनंदित कर दिया। पंडाल में भजनों पर भक्त झूमते नजर आए। कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य यजमान प्रभाष कंसल, ममता कंसल सहित अध्यात्म चेतना संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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