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नई दिल्ली

हरिद्वार: वीर बाल दिवस: साहिबजादों के बलिदान को नमन, विधायक मदन कौशिक ने दी श्रद्धांजलि

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हरिद्वार में वीर बाल दिवस पर विधायक मदन कौशिक ने साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह के बलिदान को याद किया। जानें खालसा पंथ और साहिबजादों के शौर्य की गौरवगाथा।

हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के गोविंद घाट पर सिख समाज द्वारा आयोजित ‘बलिदान दिवस’ कार्यक्रम में वीर बाल दिवस अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने 10वें गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत भारतीय इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय है।
विधायक मदन कौशिक ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि साल 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। मुगलों के अत्याचार के दौरान साल 1705 में गुरु जी को अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा। उनके दो छोटे पुत्रों, जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने मुगल शासक औरंगजेब के दबाव और प्रलोभनों के बावजूद इस्लाम स्वीकार नहीं किया। इन मासूम वीरों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वीर बाल दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को साहिबजादों के अदम्य साहस और वीरता के बारे में शिक्षित करना है। मुगलों की क्रूरता के आगे न झुकने वाले इन बाल नायकों की स्मृति हर वर्ष 26 दिसंबर को सम्मान के साथ मनाई जाती है, ताकि समाज उनके त्याग से प्रेरणा ले सके।
गोविंद घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में स्थानीय लोग और सिख समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पार्षद परमिंदर सिंह गिल, एडवोकेट राजकुमार और गौरव वर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने जोर दिया कि सरहिंद के नवाब वजीर खान द्वारा किए गए अत्याचारों का सामना जिस वीरता से साहिबजादों ने किया, वह पूरी दुनिया के इतिहास में विरल है।
अंत में, वक्ताओं ने इस बात पर खुशी जताई कि अब पूरे देश में सरकारी स्तर पर वीर बाल दिवस मनाया जा रहा है। यह आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम और धर्म के प्रति अडिग रहने की भावना जागृत कर रहा है। कार्यक्रम का समापन गुरुवाणी के पाठ और अरदास के साथ हुआ। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता और धर्म की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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