हल्द्वानी
हल्द्वानी उत्तरायणी मेला 2026: भव्य शोभायात्रा में उमड़ा कुमाऊं की संस्कृति का सैलाब
हल्द्वानी के 45वें उत्तरायणी मेले के समापन पर भव्य शोभायात्रा निकली। छौलिया नृत्य, झांकियां और पारंपरिक पहाड़ी जीवन की झलक ने मोहा मन। देखें 5000 लोगों का उत्साह।
हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में 45वें उत्तरायणी मेले के समापन अवसर पर निकली भव्य शोभायात्रा ने कुमाऊं की लोक संस्कृति, आस्था और परंपराओं को जीवंत कर दिया। मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर शहर की सड़कें पहाड़ी रंग में रंगी नजर आईं। इस गौरवशाली शोभायात्रा में लगभग 5 हजार से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी समृद्ध विरासत का प्रदर्शन किया।
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण तलवार और ढाल के साथ थिरकते छौलिया नर्तक रहे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों—ढोल, दमाऊं और रणसिंघे की गूंज के बीच गोलू देवता के जागरों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ जागर की धुनों पर झूमते दिखे, जो कुमाऊं अंचल की अटूट धार्मिक आस्था को प्रदर्शित करता है।
इस बार की झांकियों में कुमाऊं के ग्रामीण जनजीवन को बड़ी खूबसूरती से उकेरा गया था। पिथौरागढ़ और मुनस्यारी से आई महिलाओं ने चलते-फिरते ऊन से स्वेटर बुनने, ओखल में धान कूटने और हाथों में पहाड़ी फल लेकर अपनी पारंपरिक जीवनशैली की जीवंत प्रस्तुति दी। यह दृश्य आधुनिक पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों को समझने का एक शानदार अवसर साबित हुआ।
मेला समिति के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य लुप्त होती पहाड़ी विधाओं को संरक्षण देना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। शोभायात्रा में शामिल विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्कूली बच्चों ने उत्तराखंड की वीरगाथाओं और लोक कथाओं पर आधारित झांकियां भी प्रस्तुत कीं। समापन दिवस पर उमड़ी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि लोक उत्सवों के प्रति आज भी जनता में गहरा अनुराग है।
शोभायात्रा के समापन के साथ ही 45वां उत्तरायणी मेला संपन्न हुआ, लेकिन इसकी स्मृतियां शहरवासियों के मन में ताजा रहेंगी। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया था। यह भव्य आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि इसने कुमाऊंनी एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती प्रदान की।
