उधमसिंह नगर
रुद्रपुर: हाईकमान की कॉल के बाद नरम पड़े विधायक अरविंद पांडे के तेवर
गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के बगावती सुर हाईकमान की एक कॉल के बाद बदले। त्रिवेंद्र रावत और अनिल बलूनी का दौरा रद्द। जानिए गूलरभोज में क्या हुआ।
रुद्रपुर। उत्तराखंड भाजपा के कद्दावर नेता और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के बगावती तेवर गुरुवार को अचानक शांत हो गए। पिछले कई दिनों से अपनी ही सरकार को घेर रहे पांडे अब बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान की एक प्रभावशाली कॉल के बाद विधायक के सुर पूरी तरह बदल गए। इसके बाद उन्होंने गूलरभोज आने वाले बड़े नेताओं को फोन कर कार्यक्रम रद्द करने का अनुरोध किया।
सुखवंत आत्महत्या प्रकरण और खुद पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर विधायक अरविंद पांडे सुर्खियों में थे। इसी बीच प्रशासन ने उन्हें सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का नोटिस थमा दिया, जिससे टकराव बढ़ गया था। गुरुवार को हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी समेत कई दिग्गजों का उनके आवास पर जुटने का कार्यक्रम था। माना जा रहा था कि यह शक्ति प्रदर्शन प्रदेश की सियासत में बड़ा संदेश देगा।
गुरुवार सुबह जब समर्थक गूलरभोज स्थित आवास पर जुटने लगे, तभी हाईकमान का संदेश पांडे तक पहुँचा। दिल्ली के एक राष्ट्रीय नेता ने फोन पर उन्हें पार्टी की छवि को नुकसान न पहुँचाने की हिदायत दी। इसके तुरंत बाद पांडे ने त्रिवेंद्र रावत और मदन कौशिक जैसे नेताओं को फोन किया। उन्होंने उनके समर्थन के लिए आभार जताया और अनुरोध किया कि वे फिलहाल गूलरभोज न आएं।
मीडिया से बात करते हुए पांडे ने पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के एक अनुशासित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने आवास पर जुटे समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जनसंघर्ष करना एक सच्चे सेवक का कर्तव्य है। अतिक्रमण के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि टिनशेड बनाना अतिक्रमण है, तो प्रशासन उस पर कब्जा ले सकता है।
अरविंद पांडे ने भावुक लहजे में कहा कि जनहित के लिए संघर्ष में लगे मुकदमे उनके लिए गहने के समान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जनता की भलाई के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे, लेकिन पार्टी की मर्यादा का भी ध्यान रखेंगे। फिलहाल, इस घटनाक्रम से उत्तराखंड भाजपा में चल रही बड़ी खींचतान थमती नजर आ रही है। सियासी गलियारों में हाईकमान के इस दखल की खासी चर्चा हो रही है।
