हरिद्वार
सेलुलर जेल की यातनाएं देख विदीर्ण हुआ हृदय, सेनानियों की वीरगाथा बने पाठ्यक्रम का हिस्सा
हरिद्वार में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि। जितेन्द्र रघुवंशी ने सेलुलर जेल की अमानवीय यातनाओं का किया सजीव वर्णन।
हरिद्वार। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति द्वारा संचालित ‘हर माह प्रथम रविवार’ अभियान के तहत आज 38वें रविवार को शहीदों को नमन किया गया। ज्वालापुर स्थित अमर शहीद जगदीश वत्स पार्क में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार ने ध्वजारोहण किया और उपस्थित जनसमूह ने अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।
समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने हाल ही में अंडमान निकोबार (श्री विजयपुरम) की सेलुलर जेल की अपनी यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कालापानी की सजा के दौरान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को जो यातनाएं दी गईं, वे रूह कपा देने वाली थीं। रघुवंशी ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत की हवा में सांस ले रहे हैं, वह उन्हीं बलिदानों का परिणाम है। सेलुलर जेल में दी गई सजाएं अमानवीयता की सारी हदें पार कर देती थीं।
कार्यक्रम में साहित्यकार अरुण पाठक ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए कहा कि गुमनाम शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जीवन गाथा को माध्यमिक विद्यालय तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक युवा पीढ़ी अपने स्थानीय नायकों के इतिहास से अवगत नहीं होगी, तब तक राष्ट्रभक्ति का भाव पूर्ण नहीं होगा। उन्होंने सरकार से प्रत्येक जिले के सेनानियों का जीवन परिचय प्रकाशित करने का अनुरोध किया।
वरिष्ठ पत्रकार शशि शर्मा ने सेनानी परिवारों के एकजुट होने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के सम्मान और उत्तराधिकारियों के अस्तित्व की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में दिवंगत सेनानी परिवारों के सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। इस देशभक्ति कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और शहीद परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे।
