उत्तर प्रदेश
आगरा बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार: 10 हजार की सैलरी और 17 लाख की कार, ऑपरेटर पर गिरी गाज
आगरा के बेसिक शिक्षा विभाग में संविदा कर्मचारी रिषी कटारा पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप। एसीएम-3 की जांच रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे।
आगरा: 10 हजार की नौकरी और लग्जरी लाइफस्टाइल, बेसिक शिक्षा विभाग के ऑपरेटर पर भ्रष्टाचार की गाज
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के एक संविदा कर्मचारी के भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग में ऑपरेटर के पद पर तैनात रिषी कटारा पर आय से अधिक संपत्ति और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम-3) की जांच में रिषी कटारा को गुटबाजी, फर्जी बिलों के भुगतान और अवैध वसूली में दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट अब जिलाधिकारी (DM) को सौंप दी गई है।
एसीएम-3 की रिपोर्ट में रिषी कटारा की जीवनशैली को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रिषी का मासिक वेतन मात्र 9 से 10 हजार रुपये है, लेकिन वह 17 लाख रुपये की लग्जरी कार चलाता है। यही नहीं, वह 8-8 हजार रुपये के महंगे जूते पहनता है और एक आलीशान फ्लैट में रहता है जिसका किराया उसकी कुल आय से कहीं अधिक है। पिछले 9 वर्षों से एक ही पटल पर जमे रहने के कारण उसने विभाग के लिपिकों पर भी दबदबा बना रखा है।
जांच में सामने आया है कि रिषी कटारा आरटीई (RTE) फीस रिफंड, स्कूलों की मान्यता और शिक्षकों के निलंबन-बहाली जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अनुचित लाभ लेता है। शिकायतकर्ता नरेंद्र त्यागी के अनुसार, आरोपी ने करीब 100 से अधिक फर्जी स्कूलों को यूडाइस (UDISE) कोड और मान्यता दिलाकर लाखों रुपये की वसूली की है। फर्जी बिलों के माध्यम से भी लगभग 10 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है।
एसीएम की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आरोपी ऑपरेटर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। उससे बैंक विवरण और पैन कार्ड की जानकारी मांगी गई थी, जिसे उसने उपलब्ध नहीं कराया। पूर्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) प्रवीन तिवारी ने उसे हटाने का प्रयास किया था, लेकिन ऊँची पहुँच के कारण वह पद पर बना रहा। फिलहाल, प्रशासन ने इस संगठित भ्रष्टाचार के गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
