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उत्तर प्रदेश

मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा का ग्राफ गिरा: 2 साल में 50 हजार छात्र कम, रैंकिंग में भारी गिरावट

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मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग की हालत चिंताजनक! निपुण भारत रैंकिंग में 33 से फिसलकर 63वें स्थान पर पहुंचा जिला। क्या बीएसए विमलेश कुमार सुधार पाएंगे स्थिति?

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग की सूरत बदलने के लिए निरंतर डीबीटी, डिजिटल लर्निंग और स्मार्ट क्लास जैसी योजनाएं लागू कर रही है। भारी-भरकम बजट और शिक्षक प्रशिक्षण के बावजूद जनपद मुरादाबाद में इसके अपेक्षित परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं। पिछले दो सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले की प्रगति का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है, जो विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनपद की इस गिरावट का सबसे बड़ा प्रमाण निपुण भारत मिशन की रैंकिंग है। पिछले वर्ष हुए निपुण आकलन टेस्ट में मुरादाबाद प्रदेश में 33वें स्थान पर था, जो अब लुढ़ककर 63वें नंबर पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां हरदोई जैसे पिछड़े जिले सुधार कर आगे निकल रहे हैं, वहीं मुरादाबाद का पिछड़ना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा कर रहा है।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का दूसरा पहलू छात्र संख्या में आई भारी कमी है। पिछले कुछ वर्षों में मुरादाबाद के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगभग 50 हजार तक कम हो चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का मोहभंग होना न केवल चिंता का विषय है, बल्कि जिले के अधिकारियों की नेतृत्व क्षमता और धरातल पर क्रियान्वयन की पोल खोल रहा है।

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वर्तमान में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विमलेश कुमार साल 2024 से मुरादाबाद में तैनात हैं। इससे पहले वह मिड-डे मील प्राधिकरण में उप निदेशक थे। अब देखना यह होगा कि करोड़ों के बजट और सरकारी संसाधनों के बावजूद, मुरादाबाद की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन क्या कड़े कदम उठाता है।

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