उत्तर प्रदेश
मुरादाबाद: डीएम का आदेश बेअसर, नगर क्षेत्र में NGO ही बांटेंगे मिड-डे मील
मुरादाबाद नगर क्षेत्र में बेसिक शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही। 3 महीने बाद भी स्कूलों में नहीं शुरू हो सका खाना बनना। अब 20 मई तक NGO के भरोसे रहेंगे बच्चे।
मुरादाबाद: जनपद में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी के सख्त आदेश नगर क्षेत्र में बेअसर साबित हुए हैं। जिलाधिकारी मुरादाबाद ने 23 मार्च 2026 को आदेश दिया था कि स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) के स्थान पर अब विद्यालयों में ही भोजन तैयार किया जाए। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की सुस्ती के चलते नगर क्षेत्र में यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है, जिसके कारण अब 20 मई 2026 तक फिर से NGO को ही भोजन वितरण की जिम्मेदारी दी गई है।
हैरानी की बात यह है कि मुरादाबाद की नगर पंचायतों जैसे कुन्दरकी, बिलारी और डिलारी में स्कूल स्तर पर भोजन बनाने की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। वहां खंड शिक्षा अधिकारियों ने प्रमाण पत्र भी दे दिए हैं। लेकिन शहरी क्षेत्र मुरादाबाद में 3 महीने का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी न तो रसोइया उपलब्ध हो पाए और न ही गैस कनेक्शन व खाद्यान्न की व्यवस्था की गई।

इस विफलता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब नगर पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्थाएं सुधर सकती हैं, तो शहरी क्षेत्र में विभाग क्यों पिछड़ गया? चर्चा है कि शहर के स्कूलों में NGO की खाद्य आपूर्ति का नेटवर्क बहुत बड़ा है, जिसके चलते जानबूझकर इस प्रक्रिया में देरी की गई। क्या विभाग ने जानबूझकर NGO के कार्यकाल को विस्तार देने के लिए तैयारियां अधूरी छोड़ीं?
बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अब उन क्षेत्रों में जहां तैयारियां पूरी नहीं हैं, वहां 20 मई तक NGO ही खाना बांटेंगे। जिलाधिकारी ने 31 मार्च 2026 को इसकी अनुमति प्रदान कर दी है। विभाग का तर्क है कि संसाधनों की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया, लेकिन जनता के बीच इसे विभागीय लापरवाही और मिलीभगत के रूप में देखा जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में ताजा भोजन बनने से गुणवत्ता सुधरती, लेकिन अब फिर से महीनों तक उन्हें NGO के भरोसे रहना होगा। इस मामले में अब उच्च अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। देखना यह होगा कि 20 मई के बाद भी शहर के स्कूलों में चूल्हे जलते हैं या फिर NGO का एकाधिकार बना रहता है।
