नई दिल्ली
म्यूचुअल फंड निवेशकों में हाहाकार: SIP स्टॉपेज रेशियो 76% पहुँचा, क्या आपको भी बंद करनी चाहिए अपनी किस्त?
शेयर बाजार की गिरावट से घबराए निवेशक बड़े पैमाने पर SIP बंद कर रहे हैं। स्मॉल-कैप और फ्लेक्सी-कैप में भारी नुकसान के बीच विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
नई दिल्ली। शेयर बाजार में जारी निरंतर उतार-चढ़ाव और म्यूचुअल फंड के निराशाजनक प्रदर्शन ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक-दो साल में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स द्वारा दिए गए नकारात्मक रिटर्न (Negative Returns) के कारण अब निवेशकों में अपनी एसआईपी (SIP) बंद करने की होड़ मच गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में एसआईपी स्टॉपेज रेशियो बढ़कर 76% के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जो बाजार में छाई घबराहट को साफ दर्शाता है।
जियोजित रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक मार स्मॉल-कैप और फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी पर पड़ी है। पिछले एक साल में स्मॉल-कैप फंड्स ने औसतन 15% और फ्लेक्सी-कैप ने 14% तक का घाटा दिया है। दो साल की लंबी अवधि में भी इन फंड्स में 5% से 7% की गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक मंदी की आशंकाओं ने लार्ज-कैप और मल्टी-कैप फंड्स को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जहाँ एक साल में 13 से 14% तक की गिरावट देखी गई है।
बाजार के इस कठिन दौर में सबसे ज्यादा परेशान वे नए निवेशक हैं, जिन्होंने साल 2020 की तेजी को देखकर निवेश शुरू किया था। फिनएज के सीईओ हर्ष गहलोत का मानना है कि बाजार में दोहरा नकारात्मक असर दिख रहा है। एक तरफ पुराने निवेशक रिटर्न न मिलने से अपनी किस्तें रोक रहे हैं, तो दूसरी तरफ नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन में भी भारी कमी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहली बार ऐसी बड़ी गिरावट का सामना कर रहे निवेशकों के लिए यह धैर्य की परीक्षा है।
हालांकि, बाजार के दिग्गज विशेषज्ञ इस समय एसआईपी बंद करने को एक बड़ी भूल मान रहे हैं। आनंद राठी वेल्थ की श्वेता रजनी और इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने निवेशकों को सलाह दी है कि गिरावट का दौर ही वह समय होता है जब आप कम कीमत पर अधिक यूनिट्स जमा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जो निवेशक इस मंदी में टिके रहेंगे, उन्हें भविष्य में बेहतर कंपाउंडिंग का लाभ मिलेगा। बाजार से अचानक बाहर निकलना मुनाफे के बजाय स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है।
निष्कर्षतः, म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि का खेल है। वर्तमान में बाजार में भले ही निगेटिव रिटर्न दिख रहा हो, लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े गवाह हैं कि गिरावट में किया गया निवेश ही भविष्य में मल्टीबैगर रिटर्न देता है। निवेशकों को चाहिए कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराकर अपने वित्तीय लक्ष्यों से समझौता न करें और विशेषज्ञों की राय लेकर अपने पोर्टफोलियो को संतुलित बनाए रखें।
