उत्तर प्रदेश
जूना अखाड़े का मुरादाबाद दौरा: महंतों के विवाद पर सुनवाई और ‘मठ माहात्म्य’ पुस्तक का विमोचन
जूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि ने मुरादाबाद के काली माता मंदिर में महंतों के विवाद पर सुनवाई की। इस दौरान ‘मठ माहात्म्य’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
मुरादाबाद: श्री पंचदश नाम जूना अखाड़े के पदाधिकारियों ने आज मुरादाबाद के लालबाग क्षेत्र स्थित प्राचीन श्री काली माता मंदिर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्री महंत नारायण गिरि जी महाराज (गाजियाबाद) और सेक्रेट्री श्री महंत कंचन गिरि जी महाराज के नेतृत्व में साधु-संतों का दल सुबह 11 बजे मंदिर परिसर पहुँचा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मंदिर के दो महंतों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान खोजना था।

बैठक के दौरान महंत राम गिरि जी महाराज और सज्जन गिरी जी महाराज के बीच चल रहे विवाद पर विस्तार से सुनवाई की गई। जूना अखाड़े के संतों के समक्ष यह तथ्य आया कि दोनों पक्षों के बीच मुरादाबाद के माननीय लघुवाद न्यायाधीश के न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। अखाड़े ने स्पष्ट किया कि दोनों ही गुरु परंपरा के अनुसार महंत हैं और वर्ष 2020 में अखाड़े के रजिस्टर्ड मेमोरेंडम के जरिए इन्हें लिखित रूप से महंत नियुक्त किया गया था।
विवाद पर चर्चा के उपरान्त, अखाड़े के संतों ने एक सकारात्मक पहल करते हुए साहित्य और धर्म के संगम को प्रोत्साहित किया। महंत राम गिरि जी महाराज द्वारा संकलित और रचित पुस्तक **’मठ माहात्म्य’** का अखाड़े के वरिष्ठ संतों द्वारा विधिवत विमोचन किया गया। यह पुस्तक श्री महंत नारायण गिरि जी महाराज की प्रेरणा से तैयार की गई है, जिसमें मठों की महिमा और परंपराओं का वर्णन है।
विमोचन के अवसर पर श्री महंत नारायण गिरि जी ने महंत राम गिरि के साहित्यिक प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि विवादों के बीच भी धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए लेखन कार्य करना सराहनीय है। इस दौरान उपस्थित अन्य साधु-संतों ने भी पुस्तक की विषय-वस्तु को ज्ञानवर्धक बताया और आशा व्यक्त की कि यह पाठकों को सनातन धर्म की जड़ों से जोड़ने में मदद करेगी।
बैठक के अंत में शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई। अखाड़े के पदाधिकारियों ने जोर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए अखाड़े की गरिमा को सर्वोपरि रखा जाए। इस अवसर पर भारी संख्या में स्थानीय भक्त और अखाड़े से जुड़े अन्य अनुयायी मौजूद रहे, जिन्होंने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
