देहरादून
देहरादून में नेत्रदान पर बवाल: जंग लगे उपकरणों से कॉर्निया निकालने का आरोप, पुलिस जांच शुरू
देहरादून के करनपुर में नेत्रदान की प्रक्रिया विवादों में घिरी। परिजनों ने मेडिकल टीम पर जंग लगे औजार और लापरवाही का लगाया आरोप। डालनवाला थाने में शिकायत दर्ज, जांच जारी।
देहरादून। करनपुर क्षेत्र में नेत्रदान जैसा पुनीत कार्य उस समय विवादों की भेंट चढ़ गया, जब एक परिवार ने मेडिकल टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मृतक के परिजनों का आरोप है कि नेत्रदान के लिए पहुंची टीम जंग लगे और असुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल कर रही थी। शनिवार रात इस मामले में परिजनों ने डालनवाला कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
धीरज भाटिया ने अपने पिता के निधन के बाद उनकी इच्छा पूरी करने के लिए एक निजी अस्पताल से नेत्रदान हेतु संपर्क किया था। परिजनों का आरोप है कि घर पहुंची टीम के पास मौजूद टॉर्च काम नहीं कर रही थी और उपयोग किया जा रहा एप्रन भी अत्यंत गंदा था। सबसे गंभीर आरोप उपकरणों पर जंग लगे होने का लगाया गया, जिसके कारण संक्रमण के डर से परिजनों ने प्रक्रिया को बीच में ही रुकवा दिया।
विवाद तब और गहरा गया जब टीम के साथ आए सदस्यों के वाहनों और व्यवहार में अंतर देखा गया। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ऑल्टो कार से आए थे, जबकि अस्पताल का एक अन्य कर्मी लग्जरी फॉर्च्यूनर कार में पहुंचा था। आरोप है कि मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने पुलिस के सामने समझौते की कोशिश की और चेक देने की बात भी कही। इस संदिग्ध व्यवहार ने परिवार के मन में टीम की नीयत को लेकर गहरा संदेह पैदा कर दिया।
एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चिकित्सक वैध पाए गए हैं, लेकिन विस्तृत जांच के लिए शिकायतकर्ता को सीएमओ के पास भेजा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेत्रदान एक अत्यंत सुरक्षित और जीवाणुरहित (स्टरलाइज्ड) प्रक्रिया है, जिसमें आधुनिक उपकरणों का ही प्रयोग होना चाहिए। इस घटना के कारण एक नेक पहल अधूरी रह गई, जिससे सामाजिक स्तर पर जागरूकता की कमी और लापरवाही के मुद्दे फिर से गरमा गए हैं।
अंततः, नेत्रदान जैसे संवेदनशील कार्य में पारदर्शिता और सुरक्षा का होना अनिवार्य है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह कोई बड़ी लापरवाही थी या प्रक्रियात्मक खामी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आई बैंक और संबंधित अस्पतालों को कड़े प्रोटोकॉल का पालन करना होगा ताकि दानदाताओं का भरोसा बना रहे।
